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16 साल भूख हड़ताल पर रहने वाली इरोम शर्मिला 44 की उम्र में बनीं मां, मदर्स डे के दिन 2 बच्चियों को दिया जन्म


हाईलाइट

  • इरोम शर्मिला ने बेंगलुरु के एक अस्पताल में दो जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया है
  • डॉक्टर श्रीपदा विनेकर ने बताया कि मां और बच्चियां दोनों स्वस्थ हैं
  • शर्मिला प्रेगनेंट होने के बाद से ही हॉस्पिटल में डॉक्टरों की देखरेख में थीं

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। आयरन लेडी ऑफ मणिपुर के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला ने बेंगलुरु के एक अस्पताल में दो जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया है। क्लाउड नाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की डॉक्टर श्रीपदा विनेकर ने बताया कि मां और बच्चियां दोनों स्वस्थ हैं। शर्मिला प्रेगनेंट होने के बाद से ही हॉस्पिटल में डॉक्टरों की देखरेख में थीं। शर्मिला और उनके ब्रिटिश पति डेसमॉन्ड कोटिन्हो ने बच्चियों के नाम निक्स शाखी और ऑटम तारा रखे हैं। 

मदर्स डे का दिन इरोम शर्मिला के लिए दोगुनी खुशी लेकर आया। उन्होंने 46 साल की उम्र में इन बच्चियों को जन्म दिया है। क्लाउड नाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के डॉक्टर ने बताया कि जुड़वा बच्चियों की वजह से हमें सी सेक्शन करना पड़ा। बच्चियां प्यारी और स्वस्थ हैं। इरोम रिकवर कर रही हैं और जल्दी है स्वस्थ हो जाएंगी। यह संयोगवश ही हो सकता है कि उनकी डिलिवरी मदर्स डे के दिन हुई।

डॉक्टर ने बताया कि पहली बच्ची का जन्म सुबह 9 बजकर 21 मिनट पर हुआ और उसका वजन 2.16 किलोग्राम है। वहीं दूसरी बच्ची का जन्म 9 बजकर 22 मिनट पर हुआ और उसका जन्म 2.14 किलोग्राम है। डॉक्टर ने बताया, हम अगले हफ्ते शर्मिला के ऑपरेशन की प्लानिंग कर रहे थे। जबकि शनिवार रात को उनको तेज दर्द उठा और आनन-फानन में उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। वह एक मजबूत महिला है और हम उन्हें मंगलवार और बुधवार तक डिस्चार्ज करेंगे।

बता दें कि 44 वर्षीय इरोम को 'मणिपुर की आयरन लेडी' के रूप में भी जाना जाता है। इरोम साल 2000 में मणिपुर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को वापस लेने की मांग करते हुए 16 साल तक भूख हड़ताल पर रही थी। इरोम ने 16 साल बाद 9 अगस्त, 2016 को अपनी भूख हड़ताल तोड़ दी थी। उन्होंने कहा था कि वह मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं, ताकि वह विवादास्पद AFSPA को खत्म कर सकें।

इसके बाद उन्होंने 2017 में तमिलनाडु के कोडैकानल में डेसमंड एंथोनी बेलार्नीन कॉटिन्हो से शादी कर ली थी। इरोम ने साल 2017 में मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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