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JNKVV का नियमित दैनिक वेतन भोगी 62 साल तक सेवा करने का हकदार, हाईकोर्ट ने लगाई सेवानिवृत्ति पर रोक

March 15th, 2019 17:52 IST
JNKVV का नियमित दैनिक वेतन भोगी 62 साल तक सेवा करने का हकदार, हाईकोर्ट ने लगाई सेवानिवृत्ति पर रोक

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनकेविवि) का नियमित दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी 62 साल तक सेवा करने का हकदार है। इस अभिमत के साथ जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने एक नियमित दैनिक वेतन भोगियों को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है। एकल पीठ ने दैनिक वेतन भोगी को सेवा में वापस लेने का भी आदेश दिया है।

वर्ष 1983 से कार्यरत था
साबूलाल शरणागत की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वह वर्ष 1983 से जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के पद पर कार्यरत था। 14 अगस्त 2018 को राज्य सरकार ने उसे नियमित कर दिया। नियमित सेवा में आने के बाद वह राज्य सरकार के नियमित कर्मियों की तरह 62 वर्ष में सेवानिवृत्त होने का हकदार हो गया। इसके बाद भी जेएनकेविवि ने उसे 28 फरवरी 2019 को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त कर दिया। अधिवक्ता रमेश कुशवाहा और अंकित सक्सेना ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने दैनिक वेतन भोगी को नियमित कर दिया है, इसलिए उसे 62 वर्ष का सेवा करने दिया जाना चाहिए। जेएनकेविवि ने राज्य सरकार के नियमों के विपरीत 60 साल में सेवानिवृत्त कर दिया। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने पाया कि नियमित दैनिक वेतन भोगी 62 वर्ष तक सेवा करने का अधिकार है। एकल पीठ ने दैनिक वेतन भोगी की सेवानिवृत्ति पर रोक लगाते हुए उसे सेवा में वापस लेने का आदेश दिया है।

थाने से कैसे गायब हुई रायफल, एसपी और थाना प्रभारी को नोटिस
हाईकोर्ट ने छतरपुर एसपी और ओरछा थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर पूछा है कि चुनाव के दौरान थाने में जमा की गई रायफल कैसे गायब हुई। जस्टिस सुजय पॉल की एकल पीठ ने चार सप्ताह में जवाब-तलब किया है।

छतरपुर निवासी सैयद मजहर अली की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन्होंने नगर पालिका और पंचायत चुनाव के दौरान 14 नवंबर 2014 को सुरक्षा के मद्देनजर ओरछा थाने में अपनी रायफल जमा कराई थी। जब वह 30 नवंबर 2015 को थाने में अपनी रायफल लेने पहुंचा था, तो थाना प्रभारी ने कहा कि मालखाने में रायफल नहीं मिल रही है। उसने छतरपुर पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी को आवेदन देकर रायफल ढूंढ़ने का अनुरोध किया, लेकिन उसे रायफल नहीं वापस की गई। अधिवक्ता मनोज कुशवाहा ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने सुरक्षा की दृष्टि से थाने में रायफल जमा की थी। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।

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