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ज्येष्ठ अधिकमास 2018: जानिए कब से कब तक है ज्येष्ठ अधिकमास, क्या है महत्व

BhaskarHindi.com | Last Modified - May 16th, 2018 19:28 IST

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। अधिकमास में किए गए किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य का फल अन्य किसी भी पूजा पाठ से अधिक मिलता है। इलसलिए श्रृद्दालु इस मास को अधिक पवित्र मानते हैं और इस मास में धर्म-कर्म के कार्य ज्यादा से ज्यादा करते हैं। इस वर्ष में अधिकमास 16 मई से शुरू होने जा रहा है जो 13 जून तक चलेगा। अधिक मास को मल मास, पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है। जिस चंद्र मास में सूर्य संक्राति नहीं होती, वह अधिक मास कहलाता है और जिस चंद्र मास में दो संक्रांतियों का संक्रमण हो रहा हो उसे क्षय मास कहते हैं। इसके लिए मास की गणना शुक्ल प्रतिपदा से अमावस्या तक की गई है। 
 


अधिकमास (मलमास) में क्या न करें

हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कार्य वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, तिलक, विवाह, मुंडन, गृह आरंभ या उपनयन संस्कार, निजी उपयोग के लिए भूमि, वाहन, आभूषण आदि का क्रय करना, संन्यास अथवा शिष्य दीक्षा लेना, नववधू का प्रवेश, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, यज्ञ, वृहद अनुष्ठान का शुभारंभ, अष्टकादि श्राद्ध, कुआं, बोरिंग, तालाब का खनन आदि काम नहीं करना चाहिए। नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मलमास पड़ा है। 
 


अधिकमास में क्या करें

पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ- हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। इस माह में विशेष कर रोग निवृत्ति के अनुष्ठान, ऋण चुकाने का कार्य, शल्य क्रिया, संतान के जन्म संबंधी कार्य आदि, गर्भाधान, शुभ माना जाता है,
इस माह में यात्रा करना, साझेदारी के कार्य करना, मुकदमा लगाना, बीज बोना, वृक्ष लगाना, दान देना, सार्वजनिक हित के कार्य, सेवा कार्य करने में किसी प्रकार का दोष नहीं है। इस माह में व्रत, दान, जप करने का अवश्य फल प्राप्त होता है। इस मास में सीमांत जैसे संस्कार किए जा सकते हैं।
 


अधिकमास के अधिष्ठाता हैं भगवान विष्णु 

इस मास में पूरे समय विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है,कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।

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