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कर्नाटक का सियासी संकट गहराया, दो और कांग्रेस विधायकों का इस्तीफा

कर्नाटक का सियासी संकट गहराया, दो और कांग्रेस विधायकों का इस्तीफा

हाईलाइट

  • कर्नाटक का सियासी संकट गहराता जा रहा है
  • दो और कांग्रेस विधायक- एमटीबी नागराज और के सुधाकर ने इस्तीफा दे दिया
  • दोनों विधायकों को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का वफादार माना जाता था

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक का सियासी संकट गहराता जा रहा है। बुधवार को दो और कांग्रेस विधायक- एमटीबी नागराज और के सुधाकर ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। दोनों विधायकों को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का वफादार माना जाता है और वरिष्ठ नेता के हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार में इन्हें जगह मिली थी।

नागराज ने इस्तीफा देने से पहले कहा था कि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी और उनके भाई एचडी रेवन्ना के विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों और मंत्रालयों में लगातार हस्तक्षेप के कारण विधायक गठबंधन छोड़ रहे हैं। नागराज जो ओबीसी कुरुबा समुदाय के सदस्य हैं, वे कर्नाटक में सबसे अमीर विधायकों में से एक हैं। दूसरे विधायक सुधाकर एक बागी कांग्रेस ग्रुप का हिस्सा थे जिसे भाजपा ने विधानसभा सत्र से पहले जनवरी में लालच दिया था। हालांकि बीजेपी प्लान फेल होने के बाद वह वापस कांग्रेस में आ गए थे। सुधाकर को राज्य प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने विरोध किया था।

कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफे के बाद गठबंधन सरकार से इस्तीफा देने वाले विधायकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। इनमें कांग्रेस के 13 और जेडीएस के तीन विधायक है। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने अभी किसी का भी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। कुमार ने कहा, 'मैंने किसी का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। मैं अचानक से ऐसा नहीं कर सकता। मैंने उन्हें 17 जुलाई तक का समय दिया है। मैं नियमों के तरह कार्रवाई करते हुए फैसला लूंगा। आज दो और विधायकों डॉ. के सुधाकर और एमटीबी नागराज ने इस्तीफा दिया है। जहां तक दूसरे विधायकों का सवाल है कानून अपना काम करेगा।'

बता दें कि 224 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 113 सीटों की जरुरत है। 15 बागी विधायकों के अलावा, निलंबित कांग्रेस विधायक रोशन बेग ने भी इस्तीफा दे दिया है - हालांकि उनका दावा है कि वह बागियों में शामिल नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि अगर बेग सहित 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाते हैं, तो कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन में विधायकों की संख्या घटकर 101 हो जाएगी और गठबंधन सरकार अल्पमत में आ जाएगी। उधर, भाजपा के पास 105 से ज्यादा विधायक है।

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