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जानें, तीनों लोकों में सबसे अलग क्यों है काशी...

February 27th, 2018 21:10 IST

डिजिटल डेस्क, काशी। बाबा विश्वनाथ की नगरी सबसे अलग एवं प्राचीन मानी जाती है। पुरातन परंपराएं अपने वास्तविक रूप में आज भी यहां जस की तस देखने मिलती हैं। इन्हें विश्वेश्वर भी कहा जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है और कहा जाता है कि जिस दिन ये ज्योतिर्लिंग विलुप्त हो जाएगा वह दिन प्रलय का होगा। 


गंगा नदी के तट पर
गंगा नदी के तट पर मौजूद भगवान शिव या बाबा विश्वनाथ की नगरी में हर त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन होली की धूम तो हर ओर देखते ही बनती है। यहां उत्सव करीब एक सप्ताह तक यहां चलता है। हर दिन विशेष पूजा होती है। मंदिर से श्मशान तक बाबा विश्वनाथ के भक्त भस्म, रंगों से लिपटे हुए नजर आते हैं। 


महाभारत काल से भी पहले का
इनके यहां विराजे जाने का उल्लेख महाभारत काल से भी पहले का मिलता है। शिव के त्रिशूल पर बसी इस नगरी के बारे में ये भी कहा जाता है कि जब प्रलय आएगा तब शिव स्वयं इसे अपने त्रिशूल पर सबसे अलग उठा लेंगे, जिससे इसका नाश नही होगा। 


यहां है मां पार्वती का आशीर्वाद
यहां शिव का वास है तो माता पार्वती का निवास होना भी स्वाभाविक है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि माता अन्नपूर्णा यहां साक्षात वास करती हैं और उनकी कृपा से इस नगर में कभी कोई भूखा नही सोता। किसी के घर में दरिद्रता नही ठहरती। इस वजह से ये शिव के साथ ही मां पार्वती का भी निवास स्थान माना जाता है। 
 

मिलता है मोक्ष
काशी देवों का स्थान है तो यहां मृत आत्माओं एवं प्रेतों को भी मोक्ष प्राप्ति होती है। इस वजह से यहां मौजूद श्मशान को महाश्मशान कहा जाता है। यहां उन त्याेहाराें का दृश्य सर्वाधिक अलाैकिक हाेता है जो शिव के प्रिय माने जाते हैं।

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