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दिवाली पर दुनिया भर में कुछ ऐसी होती है रौनक

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 06th, 2018 15:33 IST

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दिवाली पर दुनिया भर में कुछ ऐसी होती है रौनक

डिजिटल डेस्क । दिवाली सिर्फ आतिशबाजी का त्योहार नहीं। यह पर्व है तन, मन और धन की समृद्धि हासिल करने का, एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटने का। यही वजह है कि विदेश में लोग पटाखों के धूम-धड़ाके और शोरगुल के बगैर भी हैप्पी दिवाली मना लेते हैं। आइए जानें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कैसे मनाई जाती है दिवाली।

ब्रिटेन : लक्ष्मी मंदिर में पूजा से आगाज

लक्ष्मी मंदिर में धूप-दीपक जलाने और फूल-मिठाई चढ़ाने से होती है दिवाली की शुरुआत।
शाम को लोग घरों के अंदर-बाहर दीपक जलाते हैं, मंदिरों को दीयों और लाइटों से सजाते हैं।
एक-दूसरे को मेवे-मिठाई बांटते हैं, सामुदायिक रूप से बिना धुएं-शोरशराबे वाले पटाखे जलाते हैं।

नेपाल : गाय और कुत्ते की पूजा का चलन

पांच दिन चलता है दीपोत्सव, पहले दिन गाय को चावल खिलाने की परंपरा, मान्यता है कि लक्ष्मी गाय पर सवार होकर आती हैं।
दूसरे दिन कुत्तों को अलग-अलग पकवान खिलाने का चलन है, भैरव की सवारी माने जाते हैं कुत्ते। तीसरे दिन होता है लक्ष्मी पूजन।
लोग घरों के अंदर-बाहर मिट्टी के दीये जलाते हैं, पटाखे फोड़े जाते हैं, चौथे दिन यम पूजा होती है तो पांचवें दिन भैया दूज का व्रत।

ऑस्ट्रेलिया : नाच-गाने का तड़का

मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर पर दिवाली की रात की आतिशबाजी का नजारा देखते ही बनता है।
आकाश में रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरने वाले पटाखे छोड़े जाते हैं, जो वायु-ध्वनि प्रदूषण नहीं फैलाते।
भारतीय समुदाय के लोग एकजुट होकर नाच-गाने का लुत्फ उठाते हैं, एक-दूसरे को तोहफे देते हैं।

गुयाना : नए कपड़े पहनने का चलन

रंगोली बनाने और रंग-बिरंगी लाइटों से घर सजाने का चलन, रात में अंदर-बाहर दीये जलाये जाते है।
लोग नए कपड़े पहनकर लक्ष्मी पूजन करते हैं, गणेश भगवान को खुश करने के लिए लड्डू का भोग लगाते है।
समाज सेवा और मिल-बांटकर रहने का भाव बढ़ाने के लिए एक-दूसरे को मिठाई-तोहफे देने का रिवाज।

कनाडा : शहर से दूर होती है आतिशबाजी

हवा का रुख भांपकर शहर के बाहर सामुदायिक रूप से कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे जलाए जाते है।
आतिशबाजी का खर्च भी सब मिलकर उठाते हैं, सामुदायिक नृत्य-गायन एवं रात्रिभोज कार्यक्रम होते हैं।

पाकिस्तान : जश्न के साथ निवेश का पर्व

दिवाली पर सिर्फ हिंदू ही नहीं, अन्य समुदाय के लोग भी सोने-चांदी, प्रॉपर्टी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीदारी को शुभ मानते हैं।
शेयर बाजार में भी करते हैं निवेश, घरों-मंदिरों को दीयों से रोशन करने और पटाखे जलाने की परंपरा, एक-दूसरे को मिठाई भी बांटते हैं।

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