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जानिए कौन है नीरव मोदी ? ट्रम्प से कराया था शो रूम का उद्घाटन

September 06th, 2018 15:26 IST

डिजिटल डेस्क । देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 11 हजार 500 करोड़ का स्कैम सामने आया है। इस पूरे स्कैम को कारोबारी नीरव मोदी और उसके साथियों ने मिलकर अंजाम दिया है। आपको बता दें कि बैंक के फर्जी लेनदेन मामले में आरोपी 48 वर्षीय नीरव मोदी दुनिया की डायमंड कैपिटल कहे जाने बेल्जियम के एंटवर्प शहर के मशहूर डायमंड ब्रोकर परिवार से संबंध रखते हैं। ज्वैलरी डिजाइनर 2.3 अरब डॉलर के फायरस्टार डायमंड के संस्थापक हैं। उनकी कंपनी के दिल्ली, मुंबई, न्यूयॉर्क, लंदन, मकाऊ और हॉन्गकॉन्ग में शोरूम हैं। साल 2015 में नीरव मोदी ने जब न्यूयॉर्क में अपनी कंपनी का शोरूम खोला था तब डोनाल्ड ट्रंप उसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। ट्रंप जनवरी 2017 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे। नीरव को फोर्ब्स की भारतीय धनकुबेरों की साल 2017 की सूची में 84वें नंबर पर हैं। 

नीरव से डायमंड ज्वैलरी खरीदने वाले लोगों में दुनिया की मशहूर हस्तियां शामिल हैं, जिनमें केट विंस्लेट, रोजी हंटिंगटन-व्हाटली, नाओमी वॉट्स, कोको रोशा, लीजा हेडन और एश्वर्या राय जैसे भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अभिनेत्रियां शामिल हैं। नीरव ने अपने नाम के जुलरी ब्रांड को शुरू किया। साल 2016 में नीरव मोदी ने बॉलीवुड स्टार प्रियंका चोपड़ा को अपना ग्लोबल ब्रांड एम्बैसडर बनाया था।

नीरव कैसे बने डायमंड मर्चेंट ?

नीरव मोदी का परिवार भारतीय है, लेकिन उनकी परवरिश बेल्जियम में हुई है। नीरव मोदी ने व्हार्टन बिजनेस स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़कर अपने चाचा के कारोबार में शामिल हो गए थे। बेल्जियम के एंटवर्प शहर में पले-बढ़े नीरव की दिलचस्पी आर्ट और डिजाइन में थी और वो यूरोप के अलग-अलग म्यूजियम में आते-जाते थे। तीसरी पीढ़ी के इस युवा कारोबारी ने एक दोस्त के कहने पर पहली ज्वेलरी डिजाइन की। दोस्त की खुशी देखकर उन्हें इसी काम को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली। उस दोस्त के कहने पर उन्होंने जो पहली इयर रिंग्स डिजाइन की थी, उसमें जड़े हीरों की तलाश में कई शहरों में भटके और उनकी खोज मॉस्को में पूरी हुई। उन हीरों को देखकर उनके दोस्त की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यहीं से उनके डिजाइनर बनने की कहानी शुरू हुई। आज वो उस एकमात्र भारतीय ज्वेलरी ब्रांड के मालिक है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित है।

इसके बाद भारत में बसने और डायमंड ट्रेडिंग बिजनेस की बारीकियों को सीखने के बाद साल 1999 में उन्होंने फायरस्टार की नींव रखी। साल 2010 में वो क्रिस्टी और सॉदबी के कैटालॉग पर जगह बनाने वाले पहले भारतीय ज्वेलर बने। साल 2013 में वो फोर्ब्स लिस्ट ऑफ इंडियन बिलिनेयर में आए और तब से अपनी जगह बनाए हुए हैं। उनकी ओर से डिजाइन किया गया गोलकोंडा नेकलेस साल 2010 में हुई नीलामी में 16.29 करोड़ रुपए में बिका था, जबकि साल 2014 में एक नेकलेस 50 करोड़ रुपए में नीलाम हुआ था। उनकी माली हैसियत 1.73 अरब डॉलर (लगभग 110 अरब रुपए) है और उनकी कंपनी का रेवेन्यू 2.3 अरब डॉलर (लगभग 149 अरब रुपए) है।
 

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