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भाषा केवल बोलने या इंगित करने का माध्यम नहीं, संस्कृति का केंद्रीय पक्ष है : गिरीश्वर मिश्र

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 03rd, 2018 16:48 IST

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भाषा केवल बोलने या इंगित करने का माध्यम नहीं, संस्कृति का केंद्रीय पक्ष है : गिरीश्वर मिश्र

डिजिटल डेस्क, नागपुर। भाषा केवल बोलने या इंगित करने का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति का केंद्रीय पक्ष है। मोर भवन में  आयोजित विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशन में वर्धा हिंदी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश्वर मिश्र ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि, हिंदी किसी क्षेत्र या भू-भाग पर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में निवास करती है। हिंदी साहित्य पर कई देशों में बड़े स्तर पर काम हो रहा है। विदेशों में इस भाषा के प्रति उत्सुकता बढ़ी है। हालांकि इसमें बाजार की भी भूमिका है।

उन्होंने बताया कि, वर्धा हिंदी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में स्पेलिंग चेक की तर्ज पर हिंदी वर्तनी की जांच के लिए सक्षम और व्याकरण संबंधी त्रुटियों की जांच के लिए आचार्य विकसित की गई है। कार्यक्रम की शुरूआत गीत-गायन से हुई। प्रस्तावना अध्यक्ष सागर खादीवाला ने रखी। संयोजक परमानंद पांंडेय ने संस्था का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रास्तविक भाषण कार्यकारी प्रधानमंत्री मधुप पांडेय ने दिया। कार्यक्रम में गृहराज्यमंत्री हंसराज अहीर भी शामिल हुए। डॉ. कृष्णा श्रीवास्तव और परमानंद पांंडेय को प्रेरणा पुरस्कार, श्याम सखी मंडल को प्रेरणा पुंज सम्मान प्रदान किया गया।

हास्य सम्मेलन में लोट-पोट हुए श्रोता
वार्षिक अधिवेशन में अखिल भारतीय हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रोता हंस-हंस कर लोटपोट होते रहे। दिल्ली से आए अरुण जैमिनी, रायपुर के डाॅ. सुरेंद्र दुबे की चिर-परिचित शैली की प्रस्तुति ने श्रोताओं को लोट-पोट किया। वहीं दिल्ली के डाॅ. प्रवीण शुक्ल, कोटा, राजस्थान से आए कवि जगदीश सोलंकी की रचनाओं ने भी हास्य के रंग घोले। हास्य कवि सम्मेलन का संचालन हास्य कवि मधुप पांडेय ने किया।

5 प्रस्ताव भी पारित 
भारत सरकार से मांग की जाती है कि, वैश्विक स्तर पर हिंदी के बढ़ते महत्व, भाषा की सक्षमता और समृद्धि को देखते हुए  संवैधानिक प्रावधान के अनुसार हिंदी को अब राष्ट्रभाषा का दर्जा दे ही दिया जाए। भारत सरकार से मांग की जाती है कि, संयुक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा को सम्मिलित कराने के लिए आवश्यक शर्तों को यथाशीघ्र पूरा किया जाए। महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक स्तर पर शालेय शिक्षण में त्रिभाषा सूत्र के अनुसार हिंदी विषय अनिवार्य किया जाए।

भारत की जनसंख्या विश्व के देशों में चीन के बाद दूसरे क्रमांक पर है। करोड़ों लोग हिंदी बोलते हैं। उच्चशिक्षा  के वाणिज्य, प्रबंधन, विधि, पर्यावरण, तकनीक व अन्य विषयों के पाठ्यक्रम हिंदी में रखें जाएं और अनिवार्य रूप से हिंदी में पढ़ाए जाएं। आम नागरिक परिवार के निमंत्रण पत्र हिंदी में बनवाएं।

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