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प्रयागराज: माघी पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी लगाने संगम पहुंचे लाखों श्रद्धालु

February 19th, 2019 13:26 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। माघ माह में स्नान एवं व्रत की शाास्त्रों में बड़ी महिमा बताई गई है। मंगलवार 19 फरवरी 2019 को माघी पूर्णिमा है। प्रयागराज में संगम घाट पर लाखों श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे हैं। माघ की प्रत्येक तिथि पुण्यपर्व है, उनमें भी माघी पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया गया है। इस बार इस पूर्णिमा का महत्त्व और बढ़ गया है, क्योंकि इस समय अर्ध कुम्भ का महापर्व चल रहा है। यह माघ मासी पूर्णिमा, तीर्थस्थलों में स्नान दानादि के लिए परम फलदायिनी बताई गई है। तीर्थराज प्रयाग में इस दिन स्नान, दान, गोदान एवं यज्ञ का विशेष महत्व है।

संगमस्थल पर एक मास तक कल्पवास करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आज की तिथि एक विशेष पर्व है। माघी पूर्णिमा को एक मास का कल्पवास पूर्ण भी हो जाता है। इसी प्रकार श्रद्धालूजन अपने क्षेत्र की पवित्र नदी एवं सरोवरों में माघी पूर्णिमा को स्नान का पुण्य प्राप्त करते हैं। 

ब्राह्मणों एवं भिक्षुओं को भोजन
प्रयाग राज में इस पुण्य तिथि को सभी कल्पवासी गृहस्थ प्रातः काल गंगास्नान कर गंगा जी की आरती पूजा करते हैं तथा अपनी-अपनी कुटियों में आकर हवन करते हैं, फिर साधु सन्यासियों तथा ब्राह्मणों एवं भिक्षुओं को भोजन कराकर स्वयं भोजन ग्रहण करते हैं। वहीं कल्पवास के लिए रखी गई खाने-पीने की वस्तुएं, जो कुछ बची रहती हैं, उन्हें दान कर देते हैं। इसके बाद गंगाजी की रेणु कुछ प्रसाद रोली एवं रक्षासूत्र तथा गंगाजल लेकर पुनः गंगा माता के दरबार में उपस्थित होने की प्रार्थना कर अपने-अपने घरों को जाते हैं। 

नित्यकर्म एवं स्नानादि
माघी पूर्णिमा को कुछ धार्मिक कर्म संपन्न करने की भी विधि शास्त्रों में दी गई है। प्रातः काल नित्यकर्म एवं स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का विधि पूर्वक पूजन करें। फिर पितरों का श्राद्ध करें। असमर्थों को भोजन, वस्त्र तथा आय दें। तिल, कम्बल, कपास, गुड़, घी, मोदक, फल, चरण पादुकाएं, अन्न और दृव्य आदि का दान करके पूरे दिन का व्रत रखकर विप्रों, तपस्वियों को भोजन कराना चाहिए और सत्संग एवं कथा-कीर्तन में दिन-रात बिताकर दूसरे दिन पारण करें। 

सत्यनारायण व्रत का फल
माघ शुक्ल पूर्णिमा को यदि शनि मेष राशि पर, गुरु और चन्द्रमा सिंह राशि पर तथा सूर्य श्रवण नक्षत्र पर हों तो महामाघी पूर्णिमा का योग होता है। यह पुण्यतिथि स्नान-दानादि के लिए अक्षय फलदायिनी होती है। माघी पूर्णिमा को सत्यनारायण व्रत का फल अनन्त गुना फलदायी कहा गया है। इस प्रकार सत्य को नारायण मानकर अपने सांसारिक व्यवहारों में उसे सुप्रतिष्ठित करने का व्रत लेने वालों की कथा है- श्रीसत्यनारायण व्रत कथा। सत्य को अपनाने के लिए किसी मुहूर्त की भी आवश्यकता नहीं है। कभी भी, किसी भी दिन से यह शुभ कार्य प्रारंभ किया जा सकता है।

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