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बालाघाट : एक्जिक्यूटिव इंजीनियर 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार, लोकायुक्त पुलिस ने की कार्यवाही

August 01st, 2018 18:21 IST
बालाघाट : एक्जिक्यूटिव इंजीनियर 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार, लोकायुक्त पुलिस ने की कार्यवाही

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर विरेन्द्रसिंह वर्मा को बुधवार को जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। ईई वर्मा ने जेपी इंन्फ्रास्ट्रक्चर से 12 लाख रुपए की सिक्युरिटी राशि (एफडीआर) और 10 लाख रुपए के बिल के एवज में प्रथम किश्त के रूप में ली थी। शिकायतकर्ता जेपी इंन्फ्रास्ट्रक्चर के सुपरवाईजर उमाशंकर पटले ने बताया कि ईई ने 8 लाख रुपए की मांग की थी। जिसकी प्रथम किश्त के रूप में बुधवार वह 3 लाख रुपए देने पहुंचे थे। इसी दौरान शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रिश्वत की रकम के साथ पकड़ा। इस दौरान लोकायुक्त पुलिस डीएसपी एच.पी. चौधरी, निरीक्षक स्वप्निल दास, ऑस्कर किंडो, आरक्षक अतुल श्रीवास्तव, जीतसिंग और दिनेश दुबे मौजूद थे। 

दोपहर 2 बजे शासकीय बंगले में की गई कार्यवाही
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर विरेन्द्रसिंह वर्मा से विगत दो सालों से जिले के ठेकेदार खफा है। ठेकेदारों की मानें तो ईई श्री वर्मा हर कार्य में 6 से 8 प्रतिशत कमीशन मांगते थे। जिससे जिले के ठेकेदार काफी परेशान थे। चूंकि जेपी इंन्फ्रास्ट्रक्चर संचालक सुभय वैद्य काफी परेशान थे, जिनके एफडीआर और बिल को लेकर लगातार उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। जिसके चलते उन्होंने अपने सुपरवाईजर उमाशंकर पटले के माध्यम से लोकायुक्त पुलिस में इसकी शिकायत की थी।

जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने योजनाबद्व तरीके से ईई को ट्रैप करने उमाशंकर पटले को उसके शासकीय बंगले रिश्वत की 3 लाख रुपए की रकम लेकर भेजा। जैसे ही ईई ने रकम ली, लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने रकम बरामद कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला कायम कर जांच में लिया है। 

ठेकेदारों ने मनाई खुशी
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर विरेन्द्रसिंह वर्मा के रिश्वत लेते हुए ट्रेप होने के बाद ठेकेदारों ने खुशी मनाते हुए ईई वर्मा पर कमीशनखोरी का आरोप लगाया। जेपी इंन्फ्रास्ट्रक्चर के सुभय वैद्य ने कहा कि इसके कमीशन और काम में राशि मांगे जाने को लेकर जिले के ठेकेदार काफी परेशान थे। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री को छोड़कर मंत्री, प्रभारी मंत्री और सचिव तक की गई, किन्तु किसी ने इसे ध्यान नहीं दिया।

अंतत: हर जगह से निराशा के बाद उन्होंने इसकी शिकायत सुपरवाईजर के माध्यम से लोकायुक्त पुलिस को की और बुधवार को लोकायुक्त पुलिस ने कार्यवाही से यह साबित हो गया है कि ईई वीरेन्द्रसिंह वर्मा, ठेकेदारों से कमीशन के रूप में रुपए लेने मे कितने महारथी थे। 

ट्रांसफर रद्ध करवाकर बालाघाट में ही रहे वर्मा
बताया जाता है कि जिले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 01 के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर विरेन्द्रसिंह वर्मा लगभग 3 साल से ज्यादा समय से यहां पदस्थ है। जिसके विगत दिनों ट्रांसफर जिले से अन्यत्र हो गया था, बावजूद वह अपनी सांठगांठ से पुन: बालाघाट में ही पदस्थ हो गए । जिससे पता चलता है कि अपनी काली कमाई के लिए वे बालाघाट को एक महफूज जगह मानते थे, किन्तु यहां से ही उन्हें जीवन की सबसे बड़ी बदनामी उठानी पड़ी।

इनका कहना है
शिकायतकर्ता ने शिकायत की थी कि एफडीआर वापस करने को लेकर ईई उनसे 8 लाख रुपए की मांग कर रहे हैं। जिसकी पुष्टि होने के बाद बुधवार दोपहर लोकायुक्त की टीम ने कार्यवाही करते हुए 2-2 हजार रुपए के नोट में 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए ईई विरेन्द्रसिंह वर्मा को गिरफ्तार किया है। जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला कायम किया जाकर जांच में लिया गया है।
एचपी चौधरी, डीएसपी, लोकायुक्त पुलिस

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