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माघ पूर्णिमा पर खग्रास चंद्रग्रहण शुरू, जानिए माेक्षकाल अाैर सूतक का समय

January 31st, 2018 20:56 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। माघ मास में गंगा स्नान से अधिक पुण्यकारी दूसरा कुछ नही माना गया है। यदि इस माह में गंगा स्नान किए जाएं तो अनेक वर्षों के पाप तो नष्ट होते ही हैं साथ ही गंगा स्नान का पुण्य स्वयं एवं पूर्वजों को भी प्राप्त होता है। इस बार माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा 31 जनवरी 2018 बुधवार को है। इसी दिन चंद्रग्रहण भी अब शुरू हो गया है। यह घटना इसलिए भी खास है कि इस बार का चंद्रग्रहण तीन रंगों में नजर आ रहा है। खगोल शास्त्रियों के मुताबिक ऐसी घटना 150 सालों में पहली बार हो रही है। चंद्रग्रहण के मौके पर देशभर के मंदिरों के कपाट भी बंद रखे गए हैं। ऐसे में ग्रहणकाल में यदि आप गंगा स्नान करते हैं तो ये और भी अधिक पुण्यकारी होगा। 

उज्जैन में दिखा चंद्रग्रहण।

आज चांद दिखेगा 30% ज्यादा चमकीला और 14% बड़ा दिखेगा।

नासा इस पूरी घटना का लाइव टेलीकास्ट कर रहा है। नासा की इस लाइव तस्वीर में चांद आंशिक लाल दिख रहा है

कोलकाता में दिखा पूर्ण चंद्रग्रहण, सबसे पहले भारत में यहां दिखा था ब्लड मून और अब यहां पूर्ण चंद्रग्रहण हो गया है

बन रहा है दुर्लभ संयोग

माघी पूर्णिमा 2018 का पहला खग्रास चंद्रग्रहण पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में होगा। इस वर्ष यह दुर्लभ संयोग बना रहा है। इसका लाभ माघ मास में कल्पवास करने वाले और पूरे माह स्नान-दान-यम-नियम और संयम का पालन करने वाले जातकों को अवश्य ही मिलेगा। इस दिन काे स्नानदान के नाम से भी जाना जाता है।

                         

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इस नक्षत्र में होगा शुरू

माघी पूर्णिमा पर वैसे तो प्रातःकाल स्नान सर्वाधिक उत्तम बताया गया है, किंतु ग्रहणकाल होने की वजह से ग्रहण के उपरांत भी स्नान लाभदायी होगा। पुष्य नक्षत्र में शुरू होकर चंद्रग्रहण श्लेषा नक्षत्र मंे समाप्त होगा।

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मोक्षकाल के उपरांत करें गंगा स्नान 

चंद्रग्रहण काल में चंद्रमा पर राहू की छाया 3 घंटे 24 मिनट रहेगी। भारतीय समय के अनुसार यह शाम 5।18 पर है। मध्यकाल 7।00 बजे एवं मोक्षकाल रात्रि 8।42 पर होगा। यह समय सूतक का बताया गया है। मोक्षकाल के उपरांत गंगा, नर्मदा य अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान की स्तुति करना उत्तम फलों को प्रदान करने वाला एवं कष्टों से मुक्ति का कारक बताया गया है। 

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दान कर करें पुण्य अर्जित

माघ मास, माघी पूर्णिमा और ग्रहणकाल दोनों में ही स्नान के उपरांत दान, गरीबों को भोजन कराने का बहुत महत्व है अतः इस काल में आप दान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। यह दिन भगवान विष्णु के साथ ही गणपति आराधना के लिए भी श्रेष्ठ होगा।
 

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