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अर्द्धरात्रि से ''महाशिवरात्रि'' का मुहूर्त, इस तिथि पर रखें व्रत

February 13th, 2018 21:03 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाशिवरात्रि को लेकर भक्तों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अब वे इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर किस दिन इसे मनाया जाए, लेकिन स्कंदपुराण में उल्लेख मिलता है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की तिथि सर्वोत्तम है और इसी दिन महाशिवरात्रि का व्रत पूजन करना चाहिए।

रात्रि जागरण का मिलेगा पुण्य

इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी 2018 को रात्रि 11.34 को प्रारंभ हो रही है जो कि त्रयोदशी तिथि से युक्त है और 14 फरवरी को रात्रि 12.46 तक है। ऐसे में अर्धरात्रि से ही महाशिवरात्रि का मुहूर्त प्रारंभ हो रहा है और यदि आप प्रदोष व्रत धारण करते हैं तो रात्रि जागरण आपको दोनों ही व्रतों का पुण्य एवं फल प्रदान करेगा।

तपस्वी से गृहस्थ क्यों बने शिव
शिव गृहस्थ तथा साधु के बीच संतुलन साधते हैं, वे ऐसे योगी हैं जो गृहस्थ बने हैं। वह सबसे सुंदर हैं। अगर वो सबसे बड़े योगी व तपस्वी हैं तो सबसे बड़े गृहस्थ भी। वह सबसे अनुशासित भी हैं। इस दुनिया में देवता, दानव, राक्षस सहित हर तरह के प्राणी उनकी उपासना करते हैं। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है की एक बार पार्वती भगवान शंकर के साथ सत्संग कर रही थीं। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से पूछा, गृहस्थ लोगों का कल्याण किस तरह हो सकता है।

भगवान शिव ने बताया, सच बोलना, सभी प्राणियों पर दया करना, मन एवं इंद्रियों पर संयम रखना तथा सामर्थ्य के अनुसार सेवा-परोपकार करना कल्याण के साधन हैं। जो व्यक्ति अपने माता-पिता एवं बुजुर्गों की सेवा करता है, जो शील एवं सदाचार से संपन्न है, जो अतिथियों की सेवा को तत्पर रहता है, जो क्षमाशील है और जिसने धर्मपूर्वक धन का उपार्जन किया है, ऐसे गृहस्थ पर सभी देवता, ऋषि एवं महर्षि प्रसन्न रहते हैं।


विशेष मुहूर्त है आवश्यक

शिवरात्रि के लिए वही तिथि मान्य है जो उस काल से आच्छादित होती है। इसी दिन व्रत का महत्व है। फिर चाहे यह तिथि अर्धरात्रि के पूर्व या बाद में भी क्यों ना हो। विद्वानों का यह भी मानना है कि प्रदोष काल की तिथि व्रत के लिए मान्य होती है, किंतु इसमें काल एवं व्रत का मुहूर्त होना आवश्यक है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि के इस पर्व के दिन शिव-पार्वती का विवाह संपन्न किया जाता है। पुराणों में इसी दिन शिव-पार्वती के विवाह का दिन बताया गया है।   

मंगल कार्याें के लिए माना गया है शुभ दिन 

लाेभ, माेह अादि से दूर हाेकर यह व्रत शिव की आराधना का दिन है। जिन लाेगाें के विवाह में विलंब हो रहा है या समस्या आ रही है ताे इस दिन व्रत धारण करने से एवं विधि विधान से पूजन करने से महादेव की कृपा से उसे दांपत्य जीवन का सुख प्राप्त हाेता है। इसके लिए विशेषज्ञ का मार्गदर्शन भी लिया जा सकता है। मंगल कार्याें के प्रारंभ के लिए यह दिन बहुत ही शुभ बताया गया है। 

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