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चैत्र नवरात्रि: अष्‍टमी-नवमी आज, ऐसे करें महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी को माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह मां दुर्गा का नवां रूप हैं। जिनकी उपासना देवों के देव महादेव शिव भी करते हैं। इस चैत्र नवरात्रि पर अष्टमी और नवमीं तिथि का संयोग 13 अप्रैल को बना है। ऐसे में नवरात्र का आठवां दिन शनिवार यानी कि आज सुबह 11.41 बजे तक है। इसके बाद नवमी तिथि लग जा रही है। इसीलिए शनिवार को मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। 

अष्टमी के दिन जहां आदिशक्ति देवी दुर्गा की आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा होती है वहीं नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन भी कई भक्त अपने घरों में कंजकों को बिठाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। यदि आप नवमीं के दिन कुल पूजा या कन्या पूजा करते हैं तो हम आज आपको बता रहे हैं माता सिद्धिदात्री के विषय में कुछ विशेष बातें...

कौन हैं माता सिद्धिदात्री ?
महादेव शिव ने माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही आठ सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। इन्हीं माता के कारण भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर का पद प्राप्त हुआ, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बन गया। हिमाचल पर्वत की नंदा नामक चोटी पर इनका प्राचीन और एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। माना जाता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी प्रकार इनकी उपासना करने वाले को बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।

कैसा है माता सिद्धिदात्री का रूप 
माता सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर आशीन चार भुजा धारी वाली रक्ताम्बरी वस्त्रों को धारण किए होती होती हैं। इनके हाथों में क्रमशः सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमलपुष्प रहता है। इनके सिर पर बड़ा और ऊंचा सा स्वर्ण मुकूट और मुख पर मंद मंद सी मुस्कान माता सिद्धिदात्री का परिचय है।

ऐसे करें उपासना 
नवरात्रि के समापन के लिए ही नवमी पूजन में मातासिद्धिदात्री और नवदुर्गा का हवन किया जाता है। इनके पूजन और हवन के बाद ही नवरात्रि का समापन किया जाना शुभ माना जाता है। इस दिन दुर्गासप्तशती के नवें अध्याय से माता का पूजन करें। नवरात्रि के इस दिन देवी सहित उनके वाहन, सायुज अर्थार्त अस्त्र, शस्त्र, योगनियों एवं अन्य देवी देवताओं के नाम से हवन करने का विधान बताया गया है।
इस दिन मातासिद्धिदात्री का स्मरण करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि। सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥

माता दुर्गा के नौवें रूप को प्रणाम करते हुए इस मंत्र से स्तुति करें।

या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मातासिद्धिदात्री की आराधना से जातक को अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व आदि समस्त सिद्धियों एवं नवनिधियों की प्राप्ति होती है। इनकी उपासना से आर्तजनों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

इस दिन ऐसे करें कंजकों(छोटी-छोटी कन्याओं) की पूजा
शुद्ध घी का दीपक प्रज्योलित करने के साथ-साथ माता सिद्धिदात्री को कमलपुष्प अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही ऋतू फल और शुद्धता से बनाए गए पकवान माता सिद्धिदात्री को रक्ताम्बरी(लाल) वस्त्र के साथ अर्पण करें और साथ ही नवमी पूजने वाले कंजकों (छोटी-छोटी कन्याओं) और निर्धनों को भोजन या भंडारा कराने के बाद स्वयं भोजन पाएं।

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