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‘मेक इन इंडिया’ से 2020 तक 10 करोड़ नई नौकरियों का दावा

December 22nd, 2017 10:33 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मोदी सरकार में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, इस बात को लेकर विपक्ष लगातार निशाना साध रहा है। ऐसे में नीति आयोग के महानिदेशक-डीएमईओ और सलाहकार अनिल श्रीवास्तव ने दावा किया है कि 'मेक इन इंडिया' से 2020 तक 10 करोड़ नए रोजगार पैदा होंगे। मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई फ्लैगशिप योजना लोगों को काफी उम्मीदें भी हैं। पीएम मोदी खुद इस योजना के बारे में कई बार बहुत कुछ कह चुके हैं। अगर नीति आयोग के महानिदेशक का दावा सच होता है तो ये देश के युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बेहतर मौका होगा।

बता दें कि नौकरियों के सृजन और कौशल विकास के उद्देश्य से शुरू की गई इस सरकारी योजना को लेकर युवाओं में आस है। उन्होंने कहा कि,'हम चौथे तकनीकी रेवॉल्यूशन के दौर से गुजर रहे हैं। इसमें तकनीक का काफी इस्तेमाल है। मेक इन इंडिया के जरिए हम 2020 तक 10 करोड़ नए रोजगार सृजित करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।' 


मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस

मेक इन इंडिया के माध्यम से मोदी सरकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस कर रही है। जिससे सरकार को उम्मीदें है कि आने वाले दिनों में ही बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कई कंपनियों का दावा है कि ई-कॉमर्स और इंटरनेट सेक्टर्स से जुड़ी जॉब्स में हायरिंग को लेकर भी इजाफा देखने को मिला है। पिछले कुछ सालों में स्टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए देश में निवेश की नई संभावनाओं को तलाशने और युवाओं के नए आइडियाज पर उन्हें उद्योग लगाने के लिए अच्छा अवसर प्रदान किया गया है। एक अनुमान के मुताबिक, देश के जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 2022 तक बढ़कर 25 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। मेक इन इंडिया के जरिए 25 ऐसे सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिन्हें इंसेंटिव्स मिलेंगे और इन सेक्टर्स में इनवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए पॉलिसीज में भी बदलाव किए जाएंगे। 


ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा भारत


मोदी सरकार मेक इन इंडिया के जरिए देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में बदलना चाहती है। बता दें कि इन्हीं प्रयासों के चलते पिछले दो सालों में 107 नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित की गई हैं। जिनमें से कुछ अन्य यूनिट्स लाइनअप में हैं। वहीं दूसरी तरफ जॉब प्लेसमेंट फर्मों का अनुमान है कि मैन्युफैक्चरिंग, इंजिनियरिंग और इनसे जुड़े सेक्टर्स में तेजी आएगी। बताया जा रहा है कि अगले एक साल में इनमें तकरीबन 7.2 लाख अस्थायी नौकरियां सृजित होंगी। इन सेक्टर्स में कम स्किल्स की जरूरत वाले कंस्ट्रक्शन, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग के साथ ही अधिक स्किल की जरूरत वाले एविएशन, डिफेंस इक्विपमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स भी शामिल हैं। 

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