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जानिए कौन सी पॉलिटिकल पार्टी सबसे अमीर, बीजेपी-कांग्रेस को किसने पछाड़ा

February 08th, 2018 08:50 IST
जानिए कौन सी पॉलिटिकल पार्टी सबसे अमीर, बीजेपी-कांग्रेस को किसने पछाड़ा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पिछले साल ही देश की राजधानी में सत्ता में चल रही आम आदमी पार्टी की सरकार में चंदे को लेकर कई खुलासे हुए। सीएम अरविंद केजरीवाल पर कई आरोप लगाए गए कि उन्होंने पार्टी विस्तार के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए का चंदा लिया है। ऐसा नहीं है कि बाकी पार्टियां चंदा नहीं लेती हैं। हर पार्टी चंदा के बल पर ही पार्टी का प्रचार भी करती है और पार्टी का विस्तार भी करती है। हालांकि चंदा देने वाले कुछ लोग अपनी स्वेच्छा से चंदा देते हैं, तो कहीं कुछ लोग तेजी से उभरती हुई किसी पार्टी से जुड़ने के लिए चंदा देते हैं। हाल ही में अभिनेता कमल हासन ने भी अपनी पार्टी बनाने की बाद कहीं थी, जिसके बाद उनके पास करोड़ों रुपए का चंदा आया। यह चंदा उन्हें उनके चाहने वालों की ओर से दिया गया था, लेकिन जब कमल हासन आरोपों में घिरे तो उन्होंने चंदे की रकम वापस करने का ऐलान कर दिया। वैसे तो देश में कई बड़ी राजनीतिक पार्टियां हैं, जिसने कोष में हर साल करोड़ों रुपए का चंदा आता है। जिसे पार्टी चुनावों के दौरान खर्च करती हैं।

कौन सी पार्टी सबसे अमीर


लंबे समय से इस बात पर बहस हो रही है कि देश में सबसे ज्यादा कौन सी पार्टी अमीर है और किस पार्टी के पास सबसे अधिक डोनेशन आता है। हाल ही के दिनों में एडीआर की एक रिपोर्ट आई जिसमें इस बात का खुलासा किया गया कि एक साल में सबसे ज्यादा आय वाली पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) है। जिसकी मुखिया मायावती हैं। बसपा की 2017 की कुल आय 173.58 करोड़ बताई गई  है, जबकि देश की सात राष्ट्रीय पार्टियों में से पांच पार्टियों ने साल 2016-17 के दौरान अपनी कुल आय 299.54 करोड़ रुपए बताई है।

दो दिग्गज पार्टियों ने नहीं दी कमाई की रिपोर्ट

बता दें कि देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी कमाई का खुलासा नहीं किया है। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। चुनाव आयोग को अभी तक इन दोनों पार्टियों ने अपनी कमाई का ब्योरा नहीं भेजा है। जबकि ऑडिट रिपोर्ट की अंतिम तारीख बीते हुए तीन महीने पूरे हो गए हैं। सभी पार्टियों के लिए वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 30 अक्तूबर, 2017 थी।

इन पार्टियों ने जमा की रिपोर्ट

बहुजन समाज पार्टी (BSP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने समय से अपना ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग में जमा करवा दिया है। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने रिपोर्ट को जमा करने की अंतिम तारीख पूरी होने के 22 दिन बाद रिपोर्ट जमा की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने जमा करने की तारीख खत्म के लगभग दो महीने बाद अपनी ऑडिट रिपोर्ट 19 जनवरी, 2018 को जमा की। 
 

सबसे अधिक आय भी और कंजूस भी बसपा

राष्ट्रीय पार्टियों में आय के मामले में सीपीएम दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है जिसने अपनी आय 100.25 करोड़ बताई है। यह रकम पांच राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय का 33.47 फीसदी है। वहीं CPI की कुल आय सबसे कम मात्र 2.07 करोड़ है जो कि पांचों राष्ट्रीय पार्टियों की आय का 0.69 फीसदी है। बता दें कि इन पार्टियों की आय तो सबसे अधिक है, लेकिन इनका बैंक बैलेंस उससे ज्यादा है। इसके पीछे का कारण ये है कि इन पार्टियों ने रुपए खर्च करने में कंजूसी बर्ती है। जिसमें मायावती की पार्टी बसपा सबसे अव्वल है। बसपा ने अपनी आय की मात्र 30 फीसदी राशि (51.83 करोड़) ही खर्च किया है। वहीं AITC ने अपनी 6.39 करोड़ बताई जबकि उसने 17.87 करोड़ (280 फीसदी) खर्च किया  है। NCP ने भी अपनी 17.23 करोड़ की आय पर 7.73 की अतिरिक्त राशि खर्च की है। 


 

2016-17 में सबसे अधिक बसपा की कमाई

दिल्ली स्थित संस्था एडीआर ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टियों में से बसपा ने साल 2016-17 में अपनी आय सबसे अधिक 173.58 करोड़ बताई है। यह राशि साल 2016-17 में राष्ट्रीय पार्टियों की आय का 57.95 फीसदी है। कमाई के आंकड़ों में 2015-16 में भाजपा ने अपनी कुल आय 570.86 करोड़ बताई थी। जो उस साल सभी राष्ट्रीय पार्टियों में सबसे अधिक थी। वहीं कांग्रेस पार्टी की कुल आय 261.56 करोड़ रुपया थी जो कि दूसरे स्थान पर थी। हालांकि 2017 में इन दोनों ही पार्टियों ने चुनाव आयोग में अपने आयकर रिटर्न की कॉपी जमा नहीं की है। नौ चुनावी ट्रस्टों ने साल 2013-14 से 2016-17 के बीच यानी चार सालों के राजनीतिक दलों के चंदे को पेश किया है। नौ चुनावी न्यासों (इलेक्टोरल ट्रस्ट) ने चार सालों में 637.54 करोड़ रुपए का चंदा पार्टियों को दिया है। जिसमें बीजेपी पर नाम ऊपर है, बीजेपी को सबसे ज्यादा 488.94 करोड़ रुपए और कांग्रेस को 86.65 करोड़ रुपए का चंदा मिला है।

क्या हैं चुनावी ट्रस्ट

बता दें कि साल 2013 में सरकार ने कंपनियों को चुनावी ट्रस्ट बनाने की अनुमति दी थी, ये ट्रस्ट राजनीतिक दलों और कंपनियों के बीच चंदे के लेन-देन में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू किए गए थे। नियमों के मुताबिक चुनावी ट्रस्टों को हर वित्त वर्ष में अपनी कुल आय का 95 प्रतिशत पंजीकृत राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में देना होता है।

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