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पत्थरबाजों के खिलाफ महबूबा ने लिया केस वापस, कहा करियर बनाएंगे युवा

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 30th, 2018 17:09 IST

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डिजिटल डेस्क, कश्मीर। जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर के 4,327 युवकों के खिलाफ पथराव के मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है। कश्मीर में बड़े पैमाने पर आतंकियों के सफाए के बाद नागरिक असंतोष कम करने के इरादे से यह फैसला लिया है। इससे पहले महबूबा मुफ्ती पीएम मोदी से मिलकर घर वापसी करने वाले युवाओं को रिहा करने के लिए कहा था। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद की अध्यक्षता वाली हाई अथॉरिटी कमेटी ने बुधवार को सौंपी रिपोर्ट में केस वापसी के लिए सिफारिश की थी।

सभी वर्ग के लोगों ने की मांग

घाटी के युवाओं पर केस वापसी के लिए सभी वर्गों के लोगों ने मांग की है। महबूबा मुफ्ती के सरकार के सत्ता में आते ही केस वापसी प्रक्रिया की बहाल हो गई है। इससे पहले उन्होंने 2008 से 2014 के युवाओं के खिलाफ कोर्ट में दर्ज मामले वापस लेने का आदेश दिया था। जिसमें पहली खेप में 634 युवाओं से संबंधित 104 केस वापस ले लिए गए थे, लेकिन लगातार घाटी में हिंसा फैलने के कारण यह प्रक्रिया रूक गई थी। जिसके बाद अब 744 केसों से संबंधित 4327 युवाओं के केस वापल लेने का आदेश दिया गया है। 

उच्चाधिकारी कमेटी विचार कर रही है

बता दें कि ताजा आदेश को शामिल कर लिया जाए तो वापस लिए गए कुल मामलों की संख्या 848 हो गई है। इस तरह से कुल 4957 युवाओं पर मुकदमे समाप्त हो जाएंगे। महबूबा मुफ्ती ने यह भी वादा किया है कि कम गंभीर मामलों के आरोपी युवाओं के केस ही वापस लिए जाएंगे। हालांकि हाई अथॉरिटी कमेटी अभी इस पर विचार कर रही है, रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा। 

सकारात्मक माहौल बनेगा

सीएम मुफ्ती ने उम्मीद जताई कि केस वापसी से राज्य में सकारात्मक व शांति का माहौल बनेगा। राज्य के युवा अपना जीवन बनाने के प्रयास में लगेंगे। हाल ही में मुफ्ती ने नवआरक्षकों की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए कहा था कि आतंकियों को मार गिराने से ही आतंकवाद जैसी समस्या खत्म नहीं होगी। इस समस्या के खात्में के लिए 'मानवीय दृष्टिकोण' अपनाने की भी जरूरत है। ड्रग्स जैसी बुराई व महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा भी प्रदेश के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। 

सुरक्षा बलों ने 200 आतंकियों का किया सफाया

बता दें कि इस साल सुरक्षा बलों ने अब तक करीब 200 आतंकियों का घाटी से खात्मा कर दिया है। सीएम मुफ्ती ने कहा कि इसके साथ ही हमें आतंकवाद के पीछे की समस्याओं और उनके कारणों पर विचार करना होगा। मुफ्ती ने कहा कि मुझे जानकार हैरानी हुई की इन पत्थरबाजों में से अधिकांश की उम्र 14, 15 व 16 साल थी। पुलिस को इन बच्चों की काउंसिलिंग करानी चाहिए। 

कुछ दिनों पहले ही एक कश्मीरी फुटबॉलर माजिद इरशाद ने आतंक का रास्ता छोड़ घर वापसी की थी। इरशाद ने माता-पिता और जम्मू कश्मीर पुलिस की अपील के बाद आत्मसमर्पण कर दिया था। 

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