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आखिर 25 दिसंबर को ही क्यों मनाते हैं क्रिसमस-डे, जानिए इसका कारण

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 17th, 2017 08:46 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर में क्रिसमस की तैयारियां जोरों पर हैं, खासकर पश्चिमी देशों में। यहां क्रिसमस का उल्लास देखते ही बनता है। हम इसे बड़ा दिन के नाम से भी जानते हैं। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्रिसमस 25 को ही क्यों मनाया जाता है।  

सबसे विरल और भव्य

क्रिसमस का प्रारंभ चौथी सदी में हुआ माना जाता है। इससे पूर्व प्रभु यीशु के अनुयायी या फाॅलोअर्स इस दिन को उनके जन्म दिवस को एक सामान्य त्योहार रूप में ही मनाते हैं। यीशु के संसार में आने और उनके संसार से जाने के सैकड़ों साल बाद 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार मनाना प्रारंभ किया गया। हालांकि ऐसे प्रमाण उपलब्ध हैं जिनसे स्पष्ट है कि यीशु का जन्म 25 दिसंबर को नही, अक्टूबर माह में हुआ था। इस दिन रोम के गैर ईसाई अजेय सूर्य का जन्मदिवस मनाते थे। इसकी भव्यता और परंपरा उन दिनों सबसे विरल और भव्य थी जिसके बाद ईसाईयों ने भी इसी दिन क्रिसमस मनाने का निर्णय लिया।                                                       

सूरज के लौटने की यात्रा 

सर्दियों के मौसम में सूरज की गर्मी कम हो जाती है। रोम के गैर ईसाई मानते थे कि सूरज लंबी यात्रा पर गया है वे इस दिन को रीति-रिवाज पूर्वक इसलिए मनाते थे कि सूरज लंबी यात्रा से शीघ्र लौटे और उन्हें पुनः गर्मी प्रदान करे। उनके अनुसार 25 दिसंबर को सूरज के लौटने की यात्रा शुरू होती है। बाद में इस त्योहार की परंपराओं को क्रिसमस जोड़ा गया और इसे क्रिसमस डे के रूप में मनाया जाने लगा। 

क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा 

इस दिन क्रिसमस ट्री को सजाने की भी परंपरा है। यीशु के जन्म के बाद सभी उन्हें देखने आए। जिस दिन यह हुआ उसी दिन की याद में क्रिसमस के मौके पर सदाबहार फर के पेड़ को सजाया जाता है और इसे क्रिसमस ट्री कहा जाता है। क्रिसमस ट्री को सजाने की शुरुआत अंग्रेज धर्मप्रचारक बोनिफेंस टुयो ने की थी। 

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