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नए साल में जेब पर मार, 7 फीसदी तक बढ़ेगा मेट्रो ट्रेन का किराया

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 27th, 2017 16:38 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में मेट्रो ट्रेन लोगों की लाइफलाइन बन गई है। दिल्ली की आधी आबादी इस पर निर्भर हैं, लेकिन दिल्ली वालों को अब मेट्रो का सफर महंगा पड़ सकता है, क्योंकि जल्द ही इसका किराया बढ़ने वाला है। किराया तय करने के लिए अधिकृत केंद्र के जरिए नियुक्त समिति की सिफारिशों का पालन करते हुए मेट्रो का किराया जनवरी 2019 में एक बार फिर बढ़ाया सकता है। न्यायाधीश (सेवानिवृत) एमएल मेहता की अध्यक्षता वाली इसी समिति की सिफारिशों पर मई और अक्तूबर में दो चरणों में किराए में बढ़ोतरी की गई थी। मेट्रो रेलवे अधिनियम के तहत गठित की गई चौथी किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) ने अपनी रिपोर्ट में 'ऑटोमैटिक वार्षिक किराया समीक्षा' की भी सिफारिश की है जिसके तहत किराया 7 फीसदी तक बढ़ेगा। इस समीति के मुताबिक हर साल जनवरी में नए किराए में बढ़ोतरी को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा।
इस साल मार्च और अक्टूबर में मेट्रो का किराया बढ़ाने से लोगों को खासा दिक्कतों का सामना पड़ा। ऐसे में एक बार फिर से किराया बढ़ने की खबर ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वो मेट्रो में सफर करें या नहीं।

3 लाख यात्रियों में आई कमी 

समिति ने सिफारिश की है कि DMRC ऑटोमैटिक किराया समीक्षा फॉर्मूले के आधार पर साल में एक बार किराए की समीक्षा कर सकती है। ये फॉर्मूला कर्मचारियों, रखरखाव, ऊर्जा के खर्च और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी पर आधारित है। हाल ही आई खबर के मानें तो अक्टूबर में किराए में बढ़ोतरी करने के बाद दिल्ली मेट्रो में हर रोज 3 लाख यात्रियों में कमी आई है। ऐसे में समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'ये ऑटोमेटिक किराया समीक्षा एक जनवरी 2019 से लागू होगी और अगली एफएफसी की सिफारिशों तक हर साल ऐसा होता रहेगा।'

बता दें मेट्रो के किराये में हाल ही में बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ टकराव के दौरान केंद्रीय आवासीय और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया था कि केंद्र एफएफसी की सिफारिशों से छेड़छाड़ करने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि ऐसा करना 'कानून सम्मत' नहीं है।

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