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मंत्रिमंडल का फैसला : शुरु होंगे मोबाईल पशु चिकित्सालय, नागपुर-अमरावती में नजूल जमीन फ्री होल्ड

BhaskarHindi.com | Last Modified - February 12th, 2019 22:39 IST

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मंत्रिमंडल का फैसला : शुरु होंगे मोबाईल पशु चिकित्सालय, नागपुर-अमरावती में नजूल जमीन फ्री होल्ड

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राज्य के दुर्गम व आदिवासी बाहुल्य इलाकों में रहने वाले पशुपालिकों के पशुओं के इलाज के लिए राज्य में मुख्यमंत्री पशु संवर्धन योजना शुरु किया जाएगा। योजना के पहले चरण में 80 तहसीलों के लिए चलते-फिरते (मोबाईल) पशु चिकित्सा दस्ता शुरु होगा। मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। राज्य सरकार का मानना है कि दुर्गम इलाकों में रहने वाले पशु पालकों के पशु कई बार इलाज के अभाव में असमय दम तोड़ देते हैं। साथ ही केंद्र सरकार ने पशुओं में होने वाले लाल खूर रोग मुक्त प्रदेश के लिए महाराष्ट्र का भी चयन किया है। इस लिए राज्य की जिन तहसिलों में पशु चिकित्सालयों की कमी है, वहां मोबाईल पशु चिकित्सालय शुरु किया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक में मोबाईल पशु चिकित्सालय के लिए विशेष रुप से तैयार वाहन सहित अन्य साजो-सामाना खरीदने के लिए के लिए मान्यता दी गई है। इस मोबाईल दस्ते के लिए पशु चिकित्सा अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। विभाग के पास चिकित्साधिकारियों की कमी पड़ने पर सेवानिवृत पशु चिकित्सा अधिकारियों की सेवाएं ली जाएंगी। जबकि वाहन चालक और सहायक के लिए आऊट सोर्सिंग होगी। मोबाईल दस्ते के 80 वाहनों के लिए 12 करोड़ 80 लाख खर्च को मंजूरी दी गई है। जबकि अन्य खर्चों के लिए 3 करोड़ 94 लाख सहित कुल 16 करोड़ 74 लाख रुपए के खर्च को मंजूरी मिली है। 

नागपुर-अमरावती में नजूल जमीन फ्री होल्ड

इसके अलावा नागपुर और अमरावती राजस्व विभाग में नीलामी अथवा अन्य प्रकार से किराए पर दी गई नजूल जमीन फ्री-होल्ड करने का अधिकार संबंधित जिलाधिकारी को देने का फैसला राज्य मंत्रिमंडल ने लिया है। इससे संबंधित पट्टा धारक को जमीन का मालिकाना हक मिल सकेगा। मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार नजूल किराए पट्टे को फ्री-होल्ड करते समय आवासीय इस्तेमाल के लिए जमीन के रेडी रेकनर रेट के अनुसार बाजार मूल्य का 5 प्रतिशत और वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग के लिए जमीन के रेडी रेकनर के मुताबिक बाजार मूल्य का 10 प्रतिशत रूपांतरण अधिमूल्य वसूला जाएगा। इससे प्राप्त होने वाले राजस्व का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए करने को मंजूरी दी गई है। यह योजना ऐच्छिक है। इस सहूलियत का लाभ नहीं लेने वाले किराया पट्टा धारकों का पुरानी किराया पट्टा नीति के अनुसार किराया पट्टा शुरू रखा जाएगा। आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए तत्कालीन मध्य प्रांत और बेरार क्षेत्र में लागू कानून के अनुसार नागपूर और अमरावती राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर नजूल जमीन किराए पट्टे पर दी गई थी। करार के नियम और शर्तों के अनुसार किराया पट्टों का नवीनीकरण किया जाता है। लेकिन 1 अगस्त 2014 के किराया पट्टा दर में बढ़े पैमाने पर वृद्धि होने के कारण नवीनीकरण को लेकर लोग उदासीन हो गए थे। इसके बाद सरकार ने जमीन के भाड़े को कम कर संशोधित नीति तैयार किया। इसके बावजूद नवीनीकरण को प्रतिसाद नहीं मिल रहा था और जमीन का मालिकाना हक देने की बार-बार मांग हो रही थी। इस लिए जमीन को फ्री-होल्ड करने की सिफारिश के लिए समिति गठित की गई थी। इस समिति ने इन जमीनों को फ्री होल्ड करने की सिफारिश की थी।  

वस्त्रोद्योग नीति में संशोधन करेगी सरकार

प्रदेश में सहकारिता के आधार पर वस्त्रोद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए वस्त्रोद्योग नीति में संशोधन को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। मंत्रिमंडल ने मौजूदा 10-30-60 पैर्टन में सुधार करक 5-45-50 करेगी। इस फैसले से सभासद का पूंजी निवेश कम कर सरकारी निवेश बढ़ाकर कर्ज का प्रमाण ही कम किया गया है। इससे कपास उत्पादक उत्तर महाराष्ट्र, विदर्भ व मराठवाड़ा की सहकारी सूत मिलो को बड़े पैमाने पर मदद मिल सकेगी। संशोधित पैर्टन के अनुसार सभासद का पूंजी निवेश  5 प्रतिशत, सरकारी हिस्सेदारी 45 प्रतिशत और कर्ज 50 प्रतिशत होगा। सूत मिल स्थापित करने करने के लिए तहसील में पिछले 10 साल में लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र में कपास की बुवाई जरूरी होगा।  

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