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शिक्षा में क्षेत्रीय असमानता खत्म करना चाहती है मोदी सरकार- डॉ. सिंह

January 13th, 2018 20:21 IST
शिक्षा में क्षेत्रीय असमानता खत्म करना चाहती है मोदी सरकार- डॉ. सिंह


डिजिटल डेस्क, मुंबई । केंद्र की मोदी सरकार उच्चशिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय असमानता खत्म करना चाहती है। सरकार का लक्ष्य है कि उच्च शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाया जाए, जिससे यह आम लोगों तक पहुंच सके। इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय नई शिक्षा नीति तैयार कर रही है। आगामी 31 मार्च तक नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार हो जाएगा। यह बात केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कही। 
शनिवार को ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में डॉ.सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति में खासतौर से पांच बिंदुओ पर ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा सहज व सुलभ होनी चाहिए। आज लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जरूरत है। साथ ही क्षेत्रीय असमानता भी दूर किया जाना चाहिए। मुंबई-दिल्ली जैसे बड़े शहरों में शिक्षा संस्थानों की भरमार है जबकि छोटे शहरों में उच्च शिक्षा के अच्छे संस्थानों की बेहद कमी है। नई शिक्षा नीति से इस असमानता को भी दूर करने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा महंगी होने के से आज सिर्फ 25 फीसदी लोग ही उच्च शिक्षा हासिल कर पा रहे हैं। जबकि उच्च शिक्षा के मामले में महिलाओं की भागीदारी केवल 12 फीसदी है। इसे 20 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। 

तय होगी जिम्मेदारी
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक, संस्था संचालक से लेकर उस विभाग के मंत्री की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि फर्जीवाडे पर लगाम लगाने के लिए शिक्षकों को आधार पर जोड़ा रहा है। इससे पता चल रहा है कि एक शिक्षक एक साथ कई जगहों पर पढ़ा  रहे हैं। पर अब ऐसा नहीं हो पाएगा। शिक्षकों को पढ़ाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। 

अपराध मुक्त हुआ यूपी 
मुंबई के पुलिस आयुक्त रहे डॉ.सिंह अब उत्तर प्रदेश के बागपत से सांसद हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब अपराधों पर पूरी तरह से लगाम लग चुका है। वाहनों की चोरी सहित सभी अपराध रुक गए हैं। उन्होंने बताया कि मेरठ में लगने वाला चोर बाजार भी अब बंद हो चुका है। यूपी को अपराध मुक्त करने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सफलता पा ली है। 

मातृभाषा में हो शिक्षा
डा सिंह ने कहा कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होने पर जल्द सिखा जा सकता है। इस लिए हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि शिक्षा का माध्यम स्थानीय भाषा हो। इससे बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम होगा। उन्होंने कहा कि हम अग्रेजी का विरोध नहीं करते पर कई शोध से पता चला है कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होने पर बच्चे जल्द सिखते हैं। 

गंगा सफाई के लिए सोच बदलने की जरूरत
केंद्रीय जलसंसाधन राज्यमंत्री डा सिंह ने कहा कि गंगा सफाई के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। अगले 6 माह में इसका परिणाम दिखाई देने लगेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ ही गंगा को स्वच्छ करने के लिए लोगों को भी सोच बदलनी होगी। बगैर लोगों के सहयोग के यह कार्य मुश्किल होगा। उन्होंने बताया कि उद्योग जगत भी गंगा की सफाई के लिए आगे आ रहा है। करीब 12 औद्योगिक घरानों के साथ हम करार करने जा रहे हैं। एचसीएल के प्रमुख शिव नाडर ने वाराणसी में गंगा सफाई की जिम्मेदारी उठाई है। हमारी योजना है कि गंगा में गिरने वाले गंदे पानी की रिसाईकिलिंग कर उसे सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाए। 
 
 
  

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