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स्किल्ड प्रोफेशनल्स पर दूर की सोच अपनाए US: H-1B वीजा पर मोदी बोले

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 14:54 IST

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स्किल्ड प्रोफेशनल्स पर दूर की सोच अपनाए US: H-1B वीजा पर मोदी बोले

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एच1बी वीजा में कटौती के रुख पर नरेंद्र मोदी ने उन्हें संतुलित रवैया रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि स्किल्ड प्रोफेशनल्स की आवाजाही पर अमेरिका दूर की सोच अपनाए। एच1बी वीजा में कटौती का भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर होगा। अमेरिकी इकोनॉमी में भारतीयों का योगदान रहा है...

- 26 अमेरिकी सांसदों के एक डेलिगेशन का स्वागत करते हुए मोदी ने ट्रम्प के साथ हुई सकारात्मक बातचीत का भी जिक्र किया।
- PMO से जारी एक स्टेटमेंट के मुताबिक, मोदी ने उन क्षेत्रों पर भी बातचीत की, जिनमें दोनों देश साथ रहकर अच्छा काम कर सकते हैं।
- मोदी ने ये भी बताया कि अमेरिकी इकोनॉमी में भारतीयों का क्या योगदान है।
 
मोदी ने कहा- ट्रम्प के साथ बातचीत शानदार रही
- मोदी ने डेलिगेट्स को बताया कि ट्रम्प के साथ फोन पर हुई उनकी बातचीत शानदार रही।
- उन्होंने बताया कि बीते ढाई साल में अमेरिका के साथ भारत का रिलेशन और मजबूत हुआ है।
- पीएमओ के स्टेटमेंट के मुताबिक, मोदी ने भारत-यूएस पार्टनरशिप को मजबूत करने में कांग्रेस के योगदान की सराहना की।
 
यूएस को होता है 62% एक्सपोर्ट
- भारतीय आईटी इंडस्ट्री अमेरिका को 62% एक्सपोर्ट करती है। दूसरे नंबर पर यूरोपीय यूनियन का मार्केट है। जहां के लिए 28 फीसदी का एक्सपोर्ट होता है।

क्या है नए वीजा बिल में?
- H-1B वीजा पर नए नियमों के लिए कैलिफोर्निया की सांसद जो लॉफग्रेन ने 'द हाई स्किल्ड इंटिग्रिटी एंड फेयरनेस एक्ट 2017' बिल पेश किया था।
- 30 जनवरी को यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पेश किए गए बिल में प्रावधान है कि H-1B वीजा होल्डर्स को मिनिमम सैलरी 60 हजार डॉलर (40 लाख रु.) से दोगुनी बढ़ाकर 1.30 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रु.) देनी होगी।
- बता दें कि H-1B वीजा पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स अमेरिका जाकर काम करते हैं। अगर ये बिल पास होता है तो ज्यादा सैलरी के प्रोविजन के चलते इन्फोसिस, विप्रो, टीसीएस जैसी भारतीय कंपनियों में काम कर रहे आईटी प्रोफेशनल्स की नौकरियों पर खतरा हो सकता है।
- वहीं, नए बिल के असर के चलते भारत की टॉप 5 आईटी कंपनियों मार्केट वैल्यू 50 हजार करोड़ तक गिर गई थी।
- इस बिल के तहत लोएस्ट पे कैटेगरी हटा दी गई है। यह कैटेगरी 1989 से लागू थी। इसी के तहत H-1B वीजा होल्डर्स को मिनिमम सैलरी 60 हजार डॉलर देने का नियम था।

क्या है H-1B वीजा?
- H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है।
- इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी थ्योरिटिकल या टेक्निकल एक्सपर्ट्स को अपने यहां रख सकती हैं।
- H-1B वीजा के तहत टेक्नोलॉजी कंपनियां हर साल हजारों इम्प्लॉइज की भर्ती करती हैं।
- अमेरिका भारतीयों को हर साल 65 हजार एच-1बी वीजा जारी करता है।
 
क्या कहती है H-1B वीजा पर रिपोर्ट?
- 'कम्प्यूटरवर्ल्ड' मैगजीन के मुताबिक, करीब 86% भारतीयों को H-1B वीजा कम्प्यूटर और 46.5% को इंजीनियरिंग पोजिशन के लिए दिया गया है।
- "अमेरिका हर साल 85 हजार लोगों को H-1B वीजा देता है। इनमें से करीब 20 हजार अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मास्टर्स डिग्री करने वाले स्टूडेंट्स को जारी किए जाते हैं।"
- 2016 में 2 लाख 36 हजार लोगों ने H-1B वीजा के लिए अप्लाई किया था। इसके चलते लॉटरी से वीजा दिया गया।
- H-1B वीजा क्वालिफाइड प्रोफेशनल्स को दिया जाता है। वहीं, L1 वीजा किसी कंपनी के इम्प्लॉई के अमेरिका ट्रांसफर होने पर दिया जाता है।
- इन दोनों ही वीजा का भारतीय कंपनियां जमकर इस्तेमाल करती हैं।

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