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फंड की कमी से खतरे में पड़ी मोदी की ‘चप्पल में हवाई सफर’ कराने की योजना

BhaskarHindi.com | Last Modified - June 12th, 2018 12:50 IST

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फंड की कमी से खतरे में पड़ी मोदी की ‘चप्पल में हवाई सफर’ कराने की योजना

News Highlights

  • 5 सालों में 10 करोड़ लोगों को हवाई सेवा से जोड़ने का लक्ष्य
  • 2017 तक 31 नए एयरपोर्ट शुरू करने की बनाई थी योजना शुरू हुए केवल 16
  • 70 हवाई अड्डों को उड़ान योजना से जोड़ने की योजना, 31 का नहीं हो रहा इस्तेमाल


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आम नागरिकों को सस्ता हवाई सफर कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना उड़ान फंड की कमी की वजह से रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने की पहल की गई थी। मोदी सरकार की योजना थी कि छोटे शहरों से सस्ती हवाई सेवा शुरू की जाए, ताकि हवाई चप्पल पहन कर आम लोग भी हवाई सफर कर सकें।

10 करोड़ लोगों को वायुसेवा से जोड़ना आसान नहीं
पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पुराने एयरपोर्ट को दुरुस्त करने के साथ ही कुछ नए एयरपोर्टों का निर्माण भी किया जाना है। इसके साथ ही एयरलाइंस को भी कुछ सहूलियतें मिलेंगी। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि धन की कमी की वजह से छोटे शहरों में नए एयरपोर्ट बनाने और पुराने एयरपोर्टों को अपग्रेड करने का काम तेजी से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अगले 5 वर्षों में 10 करोड़ लोगों को हवाई सेवा से जोड़ने का सरकार का लक्ष्य हासिल करना पूरा कर पाना आसान काम नहीं है।

फंड की कमी सबसे बड़ी चुनौती
पीएम मोदी की 'रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम यानी RCS (उड़ान) के तहत सरकार ने 2017 के अंत तक 31 नए एयरपोर्ट को शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन केवल 16 ही शुरू हो सके। इस परियोजना के जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कुछ राज्यों का कहना है कि उनके पास सामान्य उपकरण खरीदने के लिए भी फंड नहीं है। इसके अलावा एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर्स, टर्मिनल बिल्डिंग, सिक्यॉरिटी सिस्टम्स को तैयार करने में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है।

2500 में होगा प्लेन का सफर
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत करीब 500 किलोमीटर दूरी, 1 घंटे की फ्लाइट या 30 मिनट की हैलिकॉप्टर यात्रा के लिए मात्र 2,500 रुपये देने होंगे। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। कुल 70 हवाई अड्डों को उड़ान योजना से जोड़ा जाएगा। इनमें 31 ऐसे हैं, जिनका बिल्कुल इस्तेमाल नहीं हो रहा है, जबकि 12 हवाई अड्डे ऐसे हैं, जिनका कम इस्तेमाल हो रहा है।

20 से अधिक राज्यों को जोड़ने की योजना
इन उड़ानों से 20 से अधिक राज्यों और संघशासित प्रदेशों के हवाई अड्डों को जोड़ा जाएगा। इनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी आदि राज्य शामिल हैं। इस योजना के तहत अब तक प्रस्तावित 128 मार्गों में से महज 60 पर ही उड़ानें शुरू हो सकी हैं।

केन्द्र सरकार खरीदेगी उपकरण, राज्यों को देगी
योजना में हो रही देरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने खुद ज्यादातर उपकरणों को खरीदने की योजना बनाई है। जून के मध्य तक 15 बचे हुए एयरपोर्टों को शुरू करने के लिए राज्य सरकारों को यह सामान लीज पर दिए जाएंगे। सन 2019 लोकसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस योजना को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं, जिससे विकासपरक सुधार की उनकी साख बरकरार रहे।

तेजी से बढ़ रहा है विमानन बाजार
भारत में विमानन बाजार तेजी से बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में सालाना करीब 20 फीसदी की रफ्तार से यात्री बढ़े हैं। कुछ एयरलाइंस भी इस योजना को अपने लिए बड़े अवसर के तौर पर देख रही हैं। इस बीच एयर ओडिशा और एयर डेक्कन ने शिकायत की है कि समस्या छोटे एयरपोर्ट्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी एयरपोर्ट पर जगह नहीं है। लैंडिंग के लिए भी जगह काफी कम है। 

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