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मोक्षदा एकादशी आज, इस विधि से करें भगवान विष्णु को प्रसन्न

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 30th, 2017 08:54 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एकादशी तिथि का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जप, तप और दान का पुण्य कई हजार गुना बढ़ जाता है। इस कल्याणमयी मोक्षदा एकादशी के दिन जो भी भक्त गीता पाठ करता है वह अंधकार रूपी संसार से बाहर आता है। यह एकादशी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली भी बतायी गई है। इस वर्ष यह अाज अर्थात 30 नवंबर काे मनायी जा रही है।

पद्मपुराणमें भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर से कहते हैं कि इस दिन दीप, धूप आदि के साथ ही प्रभु की प्रिय तुलसी की पवित्र मंजरी से भगवान विष्णु का पूजन अर्चन करना चाहिए। यह एकादशी पापों का नाश करने वाली बतायी गई है। नरक में बैठे आपके पूर्वज भी इस एकादशी का पुण्य प्राप्त करते हैं और उन्हें वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है। यह कई जन्मों के पापों का नाश कर देती है। इस दिन व्रत रखकर श्रीहरि के नाम का संकिर्तन करना चाहिए। व्रत का पारण 1 दिसम्बर को प्रात: 9.39 से पहले करना होगा।

पाैराणिक कथा 

पाैराणिक कथा के अनुसार वैखानस नाम के एक राजा हुआ करते थे उनके राज्य में सभी सुख शांति से रहते थे। किसी को कोई दुख नही था, मनुष्य से लेकर पशु-पक्षी तक बिना किसी भय के जीवन का आनंद ले रहे थे, उस राजा को प्रजापालक माना जाता था। किंतु एक रात उन्हें स्वप्न आया जिसमें उन्होंने अपने पिता को देखा, वे बुरी स्थिति में थे और नरक में यातनाएं भोग रहे थे। वे इस स्वप्न से घबरा गए उन्होंने भोर होते ही सबसे पहले ज्ञानियों, पंडितों और ऋषियों से संपर्क किया और उन्हें अपने स्वप्न के बारे में बताया। सभी ने उन्हें ऋषि पर्वत के पास जाने का मार्ग बताया। 

राजा ने ऋषि पर्वत के पास पहुंचा और अपनी व्यथा बताई। राजा की अधीरता पर उन्हें दया आ गई। उन्होंने बताया कि आपके पिता अपने कर्म और गलतियों की सजा भोग रहे हैं। यदि आप उन्हें इस यातना से मुक्त कराना चाहते हैं तो आपको मार्गशीर्ष पर पड़ने वाले मोक्षदा एकादशी का व्रत करना होगा। इस एकादशी का पुण्य पिता को देने पर वे नरक से मुक्त हो जाएंगे और उहें स्वर्ग प्राप्त होगा। राजा ने इस व्रत का पारण विधि-विधान से किया और उनके पुण्य से राजा के पिता को स्वर्ग प्राप्त हुआ। तब से मोक्षदा एकादशी के व्रत का पालन किया जाता है। 

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