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'मोक्षदा एकादशी' पर भूलकर भी ना करें इन 3 चीजों का सेवन

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 29th, 2017 09:13 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मोक्षदा एकादशी जिसे गीता जयंती भी कहा जाता है। इसे दक्षिण भारत में वैकुण्ठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। महाभारत के प्रारम्भ होने से पूर्व इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान अर्थात उपदेश दिया था। इस दिन व्रत पूजन और गीता पाठ का अत्यधिक महत्व है। एकादशी के दिन अनेक ऐसे काम हैं जो वर्जित हैं। इन्हें करने से व्रत का पुण्य कम हो जाता है। इन वर्जित कार्यों में मुख्य हैं खान-पान। इस दिन उन चीजों को त्याग देना चाहिए जो करने से आमतौर पर व्रती को पुण्य फल प्राप्त नही होता। इस बार मोक्षदा एकादशी 30 नवंबर, गुरुवार को अर्थात कल है।

अतृप्त पूर्वजों को भी व्रत का पुण्य

इस दिन व्रत धारण करने से उसका पुण्य अतृप्त पूर्वजों को भी प्राप्त हाेता है। एेसी कथा भी पुराणों में वर्णित है। एेसे में यदि भक्त घरेलू कलह से परेशान है तो उसे यह व्रत अवश्य ही धारण करना चाहिए। क्याेंकि पूर्वजों के अतृप्त  हाेने पर ही घर में कलह बढ़ने का मुख्य कारण हाेता है। 


चावल का सेवन
प्रभु की आराधना के लिए मन एकाग्र होना बहुत जरूरी है। इसलिए इस दिन चावल का सेवन नही करना चाहिए। इससे मन चंचल होता है और एकाग्रता भंग होती है। 
 

जौ का सेवन
जौ के संबंध में मान्यता है कि यह महर्षि मेधा के शरीर से उत्पन्न हुआ था। जिसकी वजह से यदि व्रती इस दिन जौ का सेवन करता है तो उसे व्रत का पुण्य फल प्राप्त नही होता। इस दिन किसी भी स्थिति में जौ का सेवन नही करना चाहिए।  


लहसुन और प्याज का त्याग
लहसुन और प्याज को विशेष पूजन व व्रत में अशुद्ध माना गया है। एकादशी के दिन इनका सेवन नही करना चाहिए। इसकी गंध युक्त और मन में काम भाव बढ़ाने की क्षमता के कारण ही अशुद्ध माना जाता है। सात्विक भोजन करने वाले कभी भी इनका सेवन नही करते। 
 

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