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आखिरकार महाराष्ट्र में मानसून ने दी दस्तक, मुसलाधार बारिश की संभावना

आखिरकार महाराष्ट्र में मानसून ने दी दस्तक, मुसलाधार बारिश की संभावना

डिजिटल डेस्क, पुणे। काफी इंतजार के बाद आखिरकार गुरूवार को मानसून महाराष्ट्र में दाखिल हुआ। अगले दो से तीन दिनों में राज्य के अन्य हिस्सों में भी दाखिल होगा, यह अनुमान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने लगाया है। अरब सागर में गुजरात के किनारों पर तूफान के कारण राज्य में मानसून दाखिल होने में देर हो रही थी। तूफान खत्म होने के बावजूद भी मानसून धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। जो 14 जून को कर्नाटक में दाखिल हुआ था। गुरूवार को दक्षिण कोंकण, कोल्हापुर और दक्षिण महाराष्ट्र में मानसून का आगमन हुआ और लंबे समय से इसका इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। अरब सागर से जोरदार हवा चल रही है। बंगाल के उपसागर के उत्तर क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र तैयार होने के संकेत मिले हैं। मानसून के लिए यह स्थिति पोषक है। इसलिए अगले दो दिनों में महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी मानसून आ जाएगा। 22 और 23 जून को कोंकण, मराठवाड़ा तथा मध्य महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।

पश्चिम में रत्नागिरि तक पहुंचा पर पूर्व में तमिलनाडू की सीमा भी पार नहीं

उधर गर्मी से बेहाल नागपुरियन्स के लिए दोपहर बौछारें राहत बनकर आईं। सुबह से ही बादलों का आसमान में मंडराना शुरू था। हालांकि धूप भी तीखापन लिए हुए थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे मौसम  पलटना शुरू हुआ।  करीब 3.30 बजे तेज बौछारों ने शहर को भिगोना शुरू किया। 1 घंटे कभी धीमी कभी तेज बौछारें शहर को भिगोती रहीं। कुछ स्थानों पर सड़कों पर भी पानी जमा हुआ। हालांकि शहर के कई इलाकों में बूंदाबांदी ही रिकार्ड की गई। वर्षा के कारण अधिकतम तापमान में बुधवार की अपेक्षा 2 डिग्री की कमी दर्ज की गई। साथ ही उमसमें भी वृद्धि रही, जिससे लोगों को परेशानी हुई। हालांकि अभी भी यह सामान्य से 5 डिग्री ऊपर है। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्डकिया गया, जो सामान्य से 5 डिग्री ऊपर रहा। न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 5 डिग्री ऊपर 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गुरुवार को मानसून ने अरब सागर की ओर से तेज रफ्तार दिखाई। गुरुवार तक कर्नाटक राज्य के मुहाने पर बैठा मानसून गुरुवार को गोवा होते हुए रत्नागिरि के मुहाने तक पहुंचगया है। दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी की ओर से अभी भी सुस्त बना हुआ है। पूर्व में अभी तामिलनाडू को भी पार नहीं कर सका है। कर्नाटक अंदरूनी हिस्से अभी भी मानसूनी बौछारों केइंतजार में हैं। 

मानसून में सुस्ती के कारण

नीनो का साया तो था ही, उस पर साइक्लोन वायु की मार भी पड़ी। इससे मॉनसून जल्द उबरता दिखाई नहीं दे रहा है। अल नीनो के कारण केरल में एक सप्ताहकी देरी से मॉनसून का आगमन हुआ। अल नीनो का मॉनसून के शुरुआती महीने जून में रहा, जो मानसून को देरी का कारण भी बना। मानसून की सुस्ती के कारण देश के ज़्यादातरराज्यों में बारिश में कमी बहुत उच्च स्तर पर पहुँच गई है। पूरे देश में 1 जून से 19 जून के बीच सामान्य से 44% कम वर्षा हुई है। विदर्भ में 1 जून से 19 जून तक 89 प्रतिशत कम वर्षादर्ज हुई है। उपराजधानी में 92 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। अब तक 75 मिमी वर्षा दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन मात्र 6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
 

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