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कैलाश पर्वत, जिस पर आज तक नहीं चढ़ पाया कोई पर्वतारोही

BhaskarHindi.com | Last Modified - May 15th, 2018 15:50 IST

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कैलाश पर्वत, जिस पर आज तक नहीं चढ़ पाया कोई पर्वतारोही

डिजिटल डेस्क। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) पर आज तक करीब 4 हजार लोग चढ़ाई कर चुके हैं। इतना ही नहीं दुनिया की जितनी भी पर्वत श्रंखलाएं हैं उन सभी पर कई बार चढ़ाई की जा चुकी है, लेकिन आप शायद ही इस बात से रू-ब-रू होंगे कि तिब्बत में पड़ने वाले कैलाश पर्वत पर आज तक किसी ने भी फतेह हासिल नहीं की है। सुनने में ये थोड़ा अजीब लगता है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि जिन पर्वतारोहियों को माउंट एवरेस्ट की 8848 मीटर की चढ़ाई करने में दिक्कत नहीं होती वो कैलाश पर्वत, जो की माउंट एवरेस्ट के मुकाबले सिर्फ 6000 मीटर है, उस पर चढ़ने से पहले हजार बार सोचते हैं। आइए जानते है इसके पीछे आखिर क्या राज है। 

देश के चार धर्मों का प्रमुख स्थान है कैलाश पर्वत

यहां पर 4 प्रमुख धर्मों को माना जाता है जिनमे जैन धर्म, हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, और बॉन धर्म आते हैं। इन सभी धर्मों में कैलाश पर्वत को एक पवित्र स्थान माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कैलाश पर्वत भगवानों का निवास स्थान है और यही वजह है कि कोई व्यक्ति आज तक उस पर चढ़ने में सफल नहीं हुआ।

मानसरोवर झील और राक्षसतल झील हैं आस-पास 

कैलाश पर्वत की तलहटी पर मानसरोवर झील और राक्षसतल झील मौजूद है। मानसरोवर झील दुनिया भर में ताजे पानी के लिए मशहूर है, जबकि राक्षस झील का पानी खारा है। राक्षसतल को रावण या राक्षस की झील भी कहा जाता है, जहां रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। दोनों ही झील एक पतली सी भूमि से विभाजित है। जहां राक्षसतल झील में लगातार तूफान आता रहता है वहीं मानसरोवर झील में मौसम हमेशा शांत बना रहता है।

प्राचीन तिब्बती लोगों का ये था मानना

प्राचीन तिब्बती लेखों के मुताबिक, "कैलाश पर्वत पर जाने के लिए कभी भी किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी, यहां बादलों के बीच देवताओं का निवास है। इस पवित्र पर्वत की चोटी को और देवताओं के चेहरों को देखने की जो भी हिम्मत करेगा, उसे मार डाला जाएगा।“ जबकि हिन्दू धर्म में मान्यता है कि कैलाश पर साक्षात् भगवान शिव निवास करते हैं.

पर्वतारोहियों को चढ़ने में होती है दिक्कत 

माउंट कैलाश के शिखर पर चढ़ने की कोशिश करने वाले कई पर्वतारोहियों में से एक कर्नल विल्सन के मुताबिक जब उन्होंन इस शिखर पर चढ़ाई के लिए सबसे आसान रास्ता खोज निकाला उसी दौरान भारी बर्फ गिरने लगी जिस वजह से वो शिखर पर चढ़ने में असमर्थ रहें। इतना ही नही ऐसे कई पर्वतारोही हैं जिन्हें श्वास से संबन्धित कोई बीमारी नहीं उन्हें भी दूसरी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

इतने सारे अध्ययनों और कई सिद्धांतों के बाद भी आज तक इस बात का पता नहीं चल पाया है कि आखिर कैलाश पर्वत पर क्यों चढ़ाई नहीं की जा सकती। हजारों लोगों ने इसकी कोशिश की लेकिन वो सब के सब नाकाम रहे। इसे ईश्वरीय कृपा य चटकार माना जाता है. 

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