comScore

मध्य प्रदेश: मंडला जिले में बैगाओं को नहीं मिल रही आहार अनुदान राशि

January 22nd, 2019 19:01 IST
मध्य प्रदेश: मंडला जिले में बैगाओं को नहीं मिल रही आहार अनुदान राशि

डिजिटल डेस्क, मंडला। कुपोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार तमाम योजनाएं संचालित करने का दावा तो करती है, लेकिन सरकारी अफसरों की लापरवाही के चलते जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि योजनाओं का लाभ पाने ग्रामीण सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आदिवासियों ने अब इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से कर अनुदान राशि शीघ्र दिलाए जाने की मांग की है।

भटक रहे हैं जरूरतमंद
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया में कुपोषण दूर करने के लिए पोषण आहार के लिए राशि दी जा रही है, लेकिन मंडला जिले में बैगाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बिछिया जनपद की ग्राम पंचायत चंगरिया के ग्राम गदिया में डेढ़ दर्जन माताएं पोषण आहर की राशि के लिए भटक रही है। पंचातय से लेकर जनपद के चक्कर काटने के बाद पोषण आहार के लिए हर माह राशि खाते में नही आ रही है। जिससे यहां योजना का लाभ नही मिल पा रहा है। बैगाओं मेें कुपोषण दूर नहीं हो रहा है।

आर्थिक रूप से पिछड़े बैगाओं को नहीं मिल रहा लाभ
जानकारी के मुताबिक विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा सहरिया और भारिया को कुपोषण से दूर करने के लिए प्रदेश सरकार से दिसम्बर 2017 में बैगा माताओं को हर माह 1 हजार रुपए आर्थिक सहायता देने का फैसला दिया था। जिसके बाद महिला मुखिया के खाते में राशि दी जा रही है। मंडला में अभी तक 10 हजार 973 बैगा माताएं पंजीकृत हैं। योजना के दो साल से चलने के बाद भी जिले में बैगा माताएं योजना के लाभ से वंचित है। बिछिया और मवई विकासखंड से लगातार मामले सामने आ रहा है। बिछिया जनपद की ग्राम पंचायत चंगरिया का गदिया बैगा बाहुल्य ग्राम है। यहां आर्थिक रूप से पिछड़े बैगाओं को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

कुपोषण का शिकार हैं बच्चे
यहां डेढ़ दर्जन बैगा माताओं को कुपोषण दूर करने के लिए खाता में 1 हजार रुपए नही पहुंच रहे हैं। यहां जुलाई 2018 में विकासखंड शिक्षा अधिकारी को माताओं ने सूची में नाम जोड़ने के लिए बैंक खाते और अन्य जानकारी के दस्तावेज दे दिये हैं, लेकिन इसके बाद भी पोषण आहार के लिए आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है। जिससे बैगा माताओं को भटकना पड़ रहा है। पंचायत से लेकर जनपद के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन योजना से वंचित हो रहे हैं।

सर्वे में छूट गये बैगा
जनजाति कार्य विभाग ने जिले में वर्ष 2018 में सर्वे कराया था, जिसमें स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों का सहारा लिया गया था। इस सर्वे में 9 हजार 482 बैगा परिवार चिन्हित किये गये थे। इस सर्वे में बैगा परिवार छूट गये है। सर्वे के बाद से बिछिया और मवई विकासखंड से बैगा माताएं सामने आ रही हैं, जिन्हें योजना का भी नहीं मिल पाया है। सर्वे के बाद 1 हजार से ज्यादा बैगा परिवार इस योजना मे जुड़ चुके हैं और इसके बाद भी छूटी माताएं सामने आ रही हैं।

कलेक्टर से की शिकायत
योजना से वंचित बैगा माताओं ने जिला कलेक्टर से शिकायत की है। जिला मुख्यालय पहुंचकर समस्या बताई, जिसके के बाद जनजाति कार्य विभाग को निर्देश दिये गये कि तत्काल बैगा माताओं के नाम जोड़े जाए। इसके बाद बैगा विकास अभिकरण में छूटे गदिया की बैगा माताओं के नाम जोड़े गये हैं। यहां लमतो बाई, कमली बाई, मुनिया बाई, सुकरती बाई, बैशाखी बाई, सुखमनी बाई, अमरती बाई, लामूसिंह बैगा, चैतू लाल, मंगलसिंह, अषडू सिंह, समरतोबाई, बुद्धलाल, पहलसिंह, संतलाल ने बताया है कि उनके परिवार को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।

दस हजार से ज्यादा बैगा पंजीकृत
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया में कुपोषण दूर करने के लिए पोषण आहार के लिए दिये जा रहे 1 हजार रुपए 10 हजार 973 पंजीकृत हो चुके हैं, जिसमें मंडला में 1414, नैनपुर में 334, बिछिया में 2 हजार 104, मवई में 862, घुघरी में 1171, मोहगांव में 1569, निवास में 1170, नारायणगंज 1545, बीजाडांडी 804 बैगाओं को पोषण आहार के लिए पंजीकृत किया गया है। इन्हें हर माह 13 करोड़ 16 लाख 76 हजार रुपए का आवंटन दिया जा रहा है।

कमेंट करें
N3JbP