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हमारे समय में इतने छक्के नहीं पड़ते थे, गेंदबाजी करना आसान था

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 05th, 2018 18:36 IST

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हमारे समय में इतने छक्के नहीं पड़ते थे, गेंदबाजी करना आसान था

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। सनराइजर्स हैदराबाद के बॉलिंग कोच और दुनिया के महानतम गेंदबाजों में से एक मुथैया मुरलीधरन का कहना है कि जब टी-20 क्रिकेट चलन में नहीं था तब गेंदबाजी करना आसान था। मुरली ने कहा कि जिस दौर में उनने क्रिकेट खेला तब गेंदबाजी करना आसान था क्योंकि बल्लेबाज इतने छक्के नहीं मारते थे। मुरलीधरन ने कहा कि अब खेल विकसित हो गया है गेंदबाजी करना आसान नहीं रह गया है। 

T-20 क्रिकेट ने छक्के मारना सिखाया 

मुथैया मुरलीधरन ने बताया कि पहले टेस्ट और वन-डे क्रिकेट के दौरान इतने छक्के नहीं लगते थे इसलिए बल्लेबाज पर हावी होना आसान होता था लेकिन जब से टी-20 क्रिकेट की शुरुआत हुई है बल्लेबाज ज्यादा छक्के मारना सीख गए हैं और इसके चलते आज के दौर में गेंदबाजी करना इतना आसान नहीं रह गया है। 

1996 में वर्ल्ड कप जीतना यादगार लम्हा 

दुनियाभर के बल्लेबाजों को अपनी फिरकी पर नचाने वाले मुथैया मुरलीधरन ने टेस्ट क्रिकेट में 800 विकेट हासिल किए हैं। मुथैया ने 1996 में श्रीलंकाई टीम के वर्ल्ड कप जीतने की यादा ताजा करते हुए कहा कि उनकी जिंदगी का वो सर्वश्रेष्ठ फल था। वो वर्ल्ड कप जीतने वाले उस लम्हे को हमेशा सहेजकर रखेंगे क्योंकि वो श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए सबसे महत्वपूर्ण पल थे। मुथैया मुरलीधरन ने ये बातें एक कार्यक्रम के दौरान बताईं। इस कार्यक्रम में मुरलीधरन के अलावा सनराइजर्स हैदराबाद टीम के कप्तान केन विलियम्सन और ओपनर शिखर धवन भी मौजूद थे, जिनने अपने अपने दिल की बात भी सबके साथ शेयर की। 

विलियम्सन ने तेंदुलकर को बताया आदर्श

कार्यक्रम में न्यूजीलैंड और सनराइजर्स हैदराबाद टीम के कप्तान केन विलियम्सन ने अपने युवा दिनों को याद करते हुए कहा कि मेरे कुछ पसंदीदा खिलाड़ी भारतीय रहे हैं। सचिन तेंदुलकर उनमें से एक हैं जिन्हें मैं अपना आदर्श मानता हूं। सचिन से मैं न्यूजीलैंड के लिए अपना मैच खेलते समय मिला। हम एक दूसरे के खिलाफ खेल रहे थे और मैं देख रहा था कि वह क्या कर रहे हैं। मेरा ध्यान भटक गया था।

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