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प्रमाण पत्र की तरह है अखबार में छपी खबर: एन रघुरामन

July 27th, 2017 15:59 IST
प्रमाण पत्र की तरह है अखबार में छपी खबर: एन रघुरामन

दैनिक भास्कर न्यूज़ डेस्क, नागपुर। भारतीय जीवन शैली में कदम जमा चुके सोशल मीडिया को इन दिनों अखबारों या समाचार संस्थाओं के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया की पत्रकारिता अवांछित समाचारों को भी बढ़ावा देती है। मैनेजमेंट गुरु एन.रघुरामन मानते हैं कि ट्रेंड कितना भी बदल जाए, कोई भी सोशल मीडिया या न्यूज पोर्टल किसी समाचार पत्र की जगह नहीं ले सकता। गुरुवार को दैनिक भास्कर के कार्यालय में सहयोगियों से चर्चा में उन्होंने अपने विचार रखे। उनका मानना है कि अखबार में छपी खबर एक तरह से प्रमाण-पत्र की तरह है। इसकी एक विश्वसनीयता है और समाचार संस्थान इसकी जिम्मेदारी भी लेता है। इसके उलट सोशल मीडिया की खबरों की विश्वसनीयता का जिम्मेदार कौन है, यह कोई तय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जमाना चाहे कितना भी आगे क्यों न बढ़े, पत्रकारिता आंकड़ों और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। यही इसका एकमात्र मंत्र है।

सबको नया जानना है, चाहे कोई बताए
हर व्यक्ति खुद को समाज में हो रही घटनाओं से अपडेट रखना चाहता है। वह आसपास जो चल रहा है, उसकी जानकारी चाहता है। खबरों की जरूरत चाहे अखबार पूरी करे, या कोई और। पेट भर खाने के बाद कुछ मीठा हो जाए, तो बात ही और होती है। उसी प्रकार खबरें पाठकों की जिज्ञासा तो शांत करती हैं पर 'वांछित' खबर उसे तृप्त कर जाती है। लिहाजा, जरूरी है कि निरंतर नई और ज्ञानवर्धक सामग्री पाठकों के सामने रखी जाए।

खुद को अपडेट नहीं किया तो पिछड़ जाएंगे
रघुरामन ने लाइफ टिप्स देते हुए कहा कि जमाने के साथ हमें खुद को अपडेट करना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करना एक धीमी प्रक्रिया है। अगर आप नया ज्ञान प्राप्त नहीं करेंगे, तो किसी भी बदलाव का विरोध करने लगेंगे। कोई आपको एक विषय के िकतने भी पहलू क्यों ना बताए, आप खुद उस विषय को कैसे देखते हैं, इससे आपका ओपिनियन बनाइए। अगर इन सारी चीजों को आप ग्रहण नहीं करेंगे तो निश्चित ही अगली पीढ़ी से खुद को जुदा कर लेंगे।

रघुरामन ने लाइफ टिप्स देते हुए कहा कि जमाने के साथ हमें खुद को अपडेट करना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करना एक धीमी प्रक्रिया है। अगर आप नया ज्ञान प्राप्त नहीं करेंगे, तो किसी भी बदलाव का विरोध करने लगेंगे। कोई आपको एक विषय के िकतने भी पहलू क्यों ना बताए, आप खुद उस विषय को कैसे देखते हैं, इससे आपका ओपिनियन बनाइए। अगर इन सारी चीजों को आप ग्रहण नहीं करेंगे तो निश्चित ही अगली पीढ़ी से खुद को जुदा कर लेंगे।

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बी के तिवारी September 14th, 2019 11:33 IST

आज मैने भास्कर नागपुर सस्करण के दो महीने के अखवार एक साथ पडे ।बहुत ही सारगभिँत समाचार एवं पड कर बहुत अच्छा लगा कम से कम आज आप भास्कर समूह पत्रकारिता को जीवंत किये हूये है । राष्ट्रीय पत्रों का बतँमान मे जनपद बार अकं प्रकाशित किये जा रहे है ।जो स्थानीय समाचार केवल चोरी हत्या बलित्कार तक ही सिमट हो कर रह गये ।भगवान इन्हे बुद्धि दे ।ताकि लोकतन्त्र बना रहे ।

Rahul Sontakke August 30th, 2019 15:47 IST

Mr Raghuraman, On 15th March 2018 , your story " Jab Shining Star Ho Jaye Dead, To Khatra" In guna edition, did the same. And affected and defamed an innocent in a dangerous way. For that I just want to update you - that on court order two FIRs has been registered against HR Remedy India's owners Sachin Patle and Rushita Vora for creating fake evidences and using them for filing a false case against Rahul Sontakke ( to whom you declared a dead and criminal star in you story) .

Pritam kumar khatri June 27th, 2019 10:12 IST

क्या हम अपनी राय आप तक पंहुचा सकते हैं

Dilip Sharma May 09th, 2019 19:13 IST

आज का दैनिक भास्कर, अजमेर, राजस्थान,,,,,, आर्यन कॉलेज का एड चिपका हुआ नहीं है बल्कि engraved है,, स्टिकर नहीं है,, अब मैं आपको कैसे पढूं?

Kavita Rawat June 18th, 2018 12:05 IST

बिलकुल सही। और समाचार पत्र की तो कह नहीं सकते लेकिन दैनिक भास्कर में जो लेख छापते हैं वे वास्तव में अपने आप में एक प्रमाण पत्र की तरह ही होते हैं। रघुरामन जी के 'मैनेजमेंट फंडे' सर्वाधिक लोकप्रिय है इसमें कोई संदेह नहीं है

Arvind April 12th, 2018 17:56 IST

Nice '. praivet company job me progress Ka funda bataye .