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नागेश्वर राव ने फिर संभाली CBI की कमान, पलटे आलोक वर्मा के फैसले

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 11th, 2019 19:10 IST

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नागेश्वर राव ने फिर संभाली CBI की कमान, पलटे आलोक वर्मा के फैसले

News Highlights

  • देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) में इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।
  • अंतरिम डायरेक्टर का चार्ज लेने के बाद नागेश्वर राव ने पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा के फैसलों का पलट दिया।
  • सेलेक्शन कमेटी ने आलोक वर्मा को गुरावार को पद से हटाया है।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) में इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के बाद अब उनकी जिम्मेदारी एम नागेश्वर राव संभाल रहे हैं। अंतरिम डायरेक्टर का चार्ज लेने के बाद नागेश्वर राव ने शुक्रवार को उन सभी ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक लगा दी जिन्हें आलोक वर्मा ने पिछले दो दिनों में जारी किया था।

बता दें कि आलोक वर्मा को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद फोर्स लीव पर भेज दिया गया था। वर्मा की गैरमौजूदगी में नागेश्वर राव को अंतरिम CBI डायरेक्टर बनाया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को राहत देते हुए दोबारा ऑफिस जॉइन करने की इजाजत दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सरकार को कानून के तहत आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का कोई अधिकार नहीं है। 77 दिनों की छुट्टी के बाद मंगलवार को आलोक वर्मा ने अपना कार्यभार संभाला था और उन अधिकांश ट्रांसफर ऑर्डरों को रद्द कर दिया था जिन्हें नागेश्वर राव ने उनकी अनुपस्थिती में जारी किए थे। हालांकि सेलेक्शन कमेटी ने 24 घंटे के भीतर ही वर्मा को पद से हटा दिया। ऐसे में अब दोबारा नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर बना दिया गया है। नागेश्वर राव ने गुरुवार रात 9 बजे अंतरिम डायरेक्टर का चार्ज लिया है। 

यहां हम आपको ये भी बता दें कि गुरुवार को दूसरी बार सेलेक्शन पैनल की बैठक रखी गई थी। पैनल ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) रिपोर्ट में वर्मा के खिलाफ लगाए गए 8 आरोपों पर गंभीरता से विचार किया। समिति ने महसूस किया कि इस मामले की आपराधिक जांच सहित एक विस्तृत जांच आवश्यक है, ऐसे में वर्मा का CBI डायरेक्टर बने रहना ठीक नहीं है। बैठक में मौजूद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे वर्मा को हटाए जाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने CVC की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए और कहा कि CVC विश्वसनीय नहीं है। खड़गे का कहना था कि आलोक वर्मा पर लगे भष्टाचार के आरोपों की अलग से जांच होना चाहिए। हालांकि  2-1 के बहुमत से आलोक वर्मा को पद से हटा दिया गया। तीन सदस्यीय इस पैनल में खड़गे के अलावा पीएम मोदी और जस्टिस एके सीकरी शामिल थे। इस पैनल की अध्यक्षता पीएम मोदी ने की थी। 

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