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3 किमी का नागपुर आज देश के 13 वें बड़े शहर में शुमार, आबादी पहुंच चुकी है 46.54 लाख के पार

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 11th, 2018 16:33 IST

3 किमी का नागपुर आज देश के 13 वें बड़े शहर में शुमार, आबादी पहुंच चुकी है 46.54 लाख के पार

डिजिटल डेस्क, नागपुर। लिमेश कुमार जंगम। अब से ठीक 152 वर्ष पूर्व अर्थात 1866 में जिस नागपुर की जनसंख्या 6 लाख 34 हजार दर्ज की गई थी, आज वह बढ़कर 46.54 लाख के पार पहुंच गई है। बता दें कि 1866 के 6 वर्ष बाद अर्थात 1872 में जब दोबारा जनगणना हुई तो 2,891 लोग कम पाए गए। यही हाल वर्ष 1891 की तुलना में वर्ष 1901 में भी देखा गया। इस मर्तबा फिर एक बार बढ़ती जनसंख्या को ब्रेक लगा और पूर्व की जनगणना के मुकाबले में 9,373 लोग कम पाए गए। वर्ष 1891 में 7,57,862 जनसंख्या के मुकाबले में वर्ष 1901 में 7,48,489 लोग ही पाए गए। भले ही यह आंकड़े कम लगें, किंतु जनसंख्या वृद्धि के भयावह चक्र का पहिया जब उलटा घूमने लगे तो उसके विकराल स्वरूप का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। 

भीषण महामारी, खतरनाक हैजा, जानलेवा चेचक और तिल-तिल तड़पाने वाले अकाल के दंश ने जनसंख्या को आगे बढ़ने के बजाय मौत की खाई की ओर धकेला था। यही वह दौर था, जब विज्ञान व चिकित्सा जगत में लाइलाज बीमारियों के उपचार खोजे जा रहे थे। हालात बदले और जनसंख्या बढ़ोतरी का पहिया फिर एक बार आगे की ओर बढ़ने लगा। आज नागपुर जिले की जनसंख्या बढ़कर 46 लाख 54 हजार तक पहुंच गई है।

बस्तियों का नागपुर अब 151 वार्डों तक पहुंचा
नागपुर शहर के निर्माण के शुरुआती दौर में वर्ष 1901 में जब जनसंख्या महज 1 लाख 27 हजार 734 हुआ करती थी, तो इस शहर का केंद्र सीताबर्डी हुआ करता था। यह मुख्य बस्ती व बाजार कहलाती थी। इसके इर्द-गिर्द केवल इतवारी, महल, धंतोली और सिविल लाइंस बस्तियां थीं। धरमपेठ और सोनेगांव दूर की बस्तियां हुआ करती थीं। जहां जाने के लिए लोग बैलगाड़ी व तांगे का उपयोग किया करते थे। मौजूदा दौर में शहर की जनसंख्या 20 लाख से अधिक हो चुकी है और 5 बस्तियों वाला नागपुर अब 151 वार्डों में अनगिनत बस्तियों में बसता है।

कपड़ा मिल व मेडिकल कालेज से मिली गति
पुराने नागपुर में एम्प्रेस मिल और मॉडेल मिल की ख्याति के कारण नागपुर सूती कपड़ों का बड़ा व्यापारिक केंद्र बना। दूर-दराज व पड़ोसी राज्यों के विविध शहरों से लोग आकर यहां बसने लगे। अनेक प्रकार के व्यापारिक संस्थानों का निर्माण हुआ। व्यापार बढ़ने लगा। इस बीच वर्ष 1952-53 में सरकार ने शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल की शुरुआत की तो इसके आस-पास हनुमान नगर, रेशमबाग, रघुजी नगर, बाभुलखेड़ा आदि बस्तियां बस गईं। तेजी से नागपुर शहर के विकास को गति मिली और शहर का विस्तार व्यापक होने लगा।

2031 तक जनसंख्या 50 लाख से होगी अधिक
वर्तमान में नागपुर जिले की जनसंख्या 46 लाख 54 हजार है। इसी गति से यदि नागपुर जिले की जनसंख्या बढ़ती गई तो प्रशासनिक आंकड़ों के आकलन के अनुसार वर्ष 2031 तक यह जनसंख्या बढ़कर 50 लाख हो जाएगी। ज्ञात हो कि, वर्ष 1908 अर्थात 110 वर्ष पूर्व नागपुर जिले में महज 4 तहसीलें हुआ करती थीं। नागपुर, काटोल, रामटेक और उमरेड तहसील से जिले का कामकाज चलता था। वर्ष 1956 में मध्य प्रांत से विभक्त कर नागपुर जिले को मुंबई राज्य में शामिल किया गया था। इसके बाद वर्ष 1960 में महाराष्ट्र की स्थापना की गई तो 1 मई 1981 को जिले में 14 तहसीलों का निर्माण किया गया।

वर्ष 1881 से बढ़ने लगी जनसंख्या 
वर्ष 1872 में नागपुर जिले की जनसंख्या घटने की आहट ने उस दौरान शासकों को भी चिंतित कर दिया था। हैजा और चेचक जैसी बीमारियों की दवाएं धीरे-धीरे ही सही, उपलब्ध होने लगीं। बारिश में सुधार हुआ, तो अकाल की गंभीरता भी कम हो गई और जनसंख्या ने रफ्तार पकड़ ली। नागपुर जिला उन दिनों मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था।

आज बड़े शहरों की लिस्ट में है शामिल
100 वर्ष पूर्व नागपुर शहर की परिधि महज 3 किमी के दायरे में सिमटी थी, अब इसके विशाल रूप से हर कोई परिचित है। करीब-करीब 50 किमी की परिधि में विस्तारित इस शहर को देश के सर्वाधिक बड़े शहरों की सूची में 13वें क्रमांक का सम्मान मिला है। यदि महाराष्ट्र के सबसे बड़े शहरों के साथ नागपुर की तुलना की जाए तो मुंबई और पुणे के बाद इसका क्रमांक आता है। राज्य के तीसरे सबसे बड़े शहर नागपुर का बीते कुछ दशकों में काफी तेजी से विकास देखा जा रहा है। जनसंख्या वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में नागपुर भी विस्तार की सीमाओं को लगातार लांघता जा रहा है।

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