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डकार गये घरकुल की किश्त, सरकारी अनुदान का हो रहा दुरुपयोग

डकार गये घरकुल की किश्त, सरकारी अनुदान का हो रहा दुरुपयोग

डिजिटल डेस्क, नागपुर। आर्थिक रूप में दुर्बल तथा विविध प्रवर्ग के परिवारों को केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से विविध घरकुल योजनाएं चलाई जाती हैं। घरकुल मंजूर होने के बाद लाभार्थी को निर्माणकार्य के लिए 18 महीने समय दिया जाता है। अनुदान 4 किस्तों में दिया जाता है। निर्माणकार्य शुरू करने के लिए पहली किस्त 35 हजार रुपए दी जाती है। फाउंडेशन होने के बाद दूसरी, दीवारें बनने के बाद तीसरी और स्लैब डालने के बाद चौथी किस्त दी जाती है। हर किस्त देने से पहले प्रत्येक चरण का काम पूरा होने की पुष्टि करने के बाद अनुदान दिया जाता है। कुछ लाभार्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने पहली किस्त लेकर हजम कर दी और निर्माणकार्य शुरू ही नहीं किया। 

सरकार देती है अनुदान
केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक दुर्बल परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई जाती है। राज्य सरकार की ओर से अनुसूचित जाति के लिए रमाई घरकुल, अनुसूचित जनजाति के लिए शबरी आवास और भटकी तथा विमुक्त जाति के लिए पारधि आवास योजना चलाई जाती है। योजना के लिए चयनित लाभार्थी काे सभी योजनाओं में 1 लाख, 50 हजार रुपए अनुदान दिया जाता है। घरकुल के लिए 1 लाख, 20 हजार, नरेगा अंतर्गत मजदूरी 18 हजार और शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपए अनुदान का समावेश है। चार किश्तों में लाभार्थियों को अनुदान दिया जाता है। 

इन योजना अंतर्गत घरकुल के निर्माण के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए, नरेगा अंतर्गत मजदूरी पर 18 हजार और शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपए अनुदान दिया जाता है। दो वर्षों में इन योजना अंतर्गत किए गए घरकुल योजना अंतर्गत 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया गया है। जिला ग्रामीण विकास मिशन अंतर्गत इन योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया। 

अनुदान वसूल किया जाएगा
जिन लोगों ने अनुदान की पहली किश्त लेकर घर नहीं बनाए, ऐसे प्रकरण लोक अदालत में रखे जाएंगे। उनसे अनुदान की रकम वसूल की जाएगी। लाभार्थी सूची से नाम हटाकर भविष्य में लाभ नहीं दिया जाएगा। 
मकरंद नेटके, प्रकल्प अधिकारी, ग्रामीण विकास मिशन

किस योजना में कितने मकान बने 
 रमाई          :    3450
 शबरी         :     1018
 प्रधानमंत्री     :     9764 
 पारधि         :      11

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