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वन विभाग ने वापस लिया बाघिन को गोली मारने का फैसला

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 15:50 IST

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वन विभाग ने वापस लिया बाघिन को गोली मारने का फैसला

दैनिक भास्कर न्यूज़ डेस्क, नागपुर. ब्रह्मपुरी वनक्षेत्र की बाघिन "टी-27 कब-1' को गोली मारने के अपने फैसले को वन विभाग ने वापस ले लिया है। यह जानकारी गुरुवार को राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ए.के. मिश्रा के हवाले से बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ को दी गई। हाईकोर्ट के बुधवार के आदेश के मुताबिक प्रधान मुख्य वन संरक्षक महाराष्ट्र सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से हाजिर थे।

हाईकोर्ट के नए आदेश के मुताबिक बाघिन को गोली मारने का फैसला लेने से पहले वन विभाग की समिति को सारे नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इसमें मुख्य रूप से पंचनामे के दौरान बाघिन के पंजों के निशान पहचानने, डीएनए टेस्ट करने, फोटो प्रूफ कराने जैसे कदम शामिल होंगे। बाघिन को गोली मारी जाएगी या नहीं, इसका फैसला वन विभाग लेगा। इस मामले में गुरुवार को कोर्ट ने प्रतिवादी वन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह है मामला
नागपुर के मुख्य वन संरक्षक ने हाल ही में ताड़ोबा के नजदीक के ब्रह्मपुरी वनक्षेत्र की बाघिन "टी-27 कब-1' को गोली मारने के आदेश दिए थे। 23 जून को ब्रह्मपुरी वन क्षेत्र में तेंदुपत्ता बीनने गए दो लोगों पर इस बाघिन ने हमला कर मार डाला था। ऐसे में वन विभाग ने बाघिन को मानव के लिए खतरा बताकर यह आदेश जारी किए थे। वन विभाग के इस फैसले के खिलाफ डॉ. जैरील बनायत ने कोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका में दावा किया गया था कि बाघिन को गोली मारने का फैसला लेने के दौरान वन विभाग ने जरूरी कारवाई नहीं की थी। अवैध रूप से गोली मारने का आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ता का कोर्ट में तर्क है कि जिस क्षेत्र में यह दुखद घटना घटी, वह बाघों के लिए आरक्षित क्षेत्र था। मरने वाले दोनों लोग वहां अवैध रूप से दाखिल हुए थे। बाघिन दो बच्चों की मां है, ऐसे में उसने हमला कर दिया। कोर्ट को यह भी तर्क दिया गया है कि नियमों के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में बाघिन को बेहोश करके उसे सुरक्षित क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए। मगर उसे सीधे गोली मारना सही नहीं है।

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