comScore

देर से ही सही, याद तो आई- 450 साल पुरानी लालगंज बावड़ी की सफाई शुरू

March 10th, 2019 19:50 IST
देर से ही सही, याद तो आई- 450 साल पुरानी लालगंज बावड़ी की सफाई शुरू

डिजिटल डेस्क, नागपुर। लालगंज की बावड़ी को पुनर्जीवित करने के लिए नागपुर महानगर पालिका 12 लाख रुपए खर्च कर रही है। सफाई होने के बाद इस कुएं के पानी की कई बार जांच की जाएगी। जांच के बाद विशेषज्ञों की राय लेकर इस पानी को उपयोग में लाने के लिए सारी उपाययोजनाएं की जाएंगी। दवा छिड़काव व अन्य तरह की रासायनिक प्रक्रिया से पानी शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद आरओ प्लांट लगाया जाएगा। इस बावड़ी का नेटवर्क पूरे प्रभाग में फैलाया जाएगा। यह काम अगले चरण में किया जाएगा। आरओ और नेटवर्क का काम ओसीडब्ल्यू के इंजीनियर के मार्गदर्शन में होगा। सफाई होने के बाद बावड़ी की मरम्मत की जाएगी। कुएं के चारों ओर कैमरे लगाकर निगरानी की जाएगी। वहां कोई कचरा-गंदगी डालते हुए पाया गया तो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के कारण कार्रवाई की जाएगी। इस बावड़ी परिसर के आसपास के परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। चार दिन पहले काम शुरू हो चुका है। पूरी सफाई होने तक 15 दिन का समय लगेगा।

जलापूर्ति करने वाले जलस्रोत गर्मी के पहले ही सूखने के कारण प्रशासन की नींद उड़ चुकी है। भविष्य में नागपुर में पानी की भीषण समस्या पैदा होनेवाली है। ऐसे हालात में पानी की बूंद-बूंद को तरसना पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए शहर में खराब हो चुके सार्वजनिक कुओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। जो काम बरसों पहले होना चाहिए था, उसकी शुरुआत अब की गई है। प्रभाग क्रमांक 21 के लालगंज चकना चौक स्थित 425 साल पुरानी नागाकालीन बावड़ी को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। मनपा इसके लिए 12 लाख रुपए खर्च कर रही है। बावड़ी में 20 से 25 ट्रक मलबा पड़ा था। पिछले चार दिनों में इस बावड़ी से 10 ट्रक मलबा निकल चुका है। डीबी स्टार ने कुछ समय पहले ऐतिहासक बावड़ी की बदहाली को लेकर खबर प्रकाशित की थी। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए पार्षद संजय महाजन ने लालगंज की बावड़ी को साफ कर उसका पानी स्वच्छ  करने का निर्णय लिया। तीन मंजिला विशालकाय बावड़ी का व्यास 270 फीट होकर इसकी गहराई करीब 125 फीट बताई जाती है।

बावड़ी ने उगला अब तक 10 ट्रक मलबा

पुरानी बस्ती लालगंज चकना चौक में यह विशालकाय बावड़ी है। जानकारों के अनुसार करीब 425 साल पहले यहां नागा साधुओं ने बस्ती बसायी थी। उस समय पानी की समस्या से निपटने के लिए इस बावड़ी का निर्माण किया था। इसका आकार लंबाई 90 फीट बाय चौड़ाई 30 फीट है। इसके, करीब 125 फीट गहरे होने का अनुमान है। यह तीन मंजिला बावड़ी है। इसमें उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। बावड़ी को देखने पर वहां कमरे नजर आते हैं। स्थानीय निवासियों ने इस बावड़ी को लेकर कई रहस्यमय बातें साझा कीं। नागाओं के लौटने के बाद इस बावड़ी पर चोरों ने कब्जा कर लिया था। बावड़ी में बने कमरों का इस्तेमाल चोरी का माल रखने के लिए किया जाने लगा। तबसे इसे चोर बावड़ी कहा जाने लगा। 

कभी बुझाती थी पूरी बस्ती प्यास

इस बावड़ी का जल शक्कर सा मीठा था। जब नल नहीं थे, तब यही बावड़ी पूरी बस्ती की प्यास बुझाती थी। नल आने के बाद इसकी अनदेखी होने लगी। लोगों ने अपने घरों का कचरा यहीं पर डालना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद यह बावड़ी ‘आत्महत्या’ के लिए भी प्रसिद्ध हुई। अब तक यहां करीब 20 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। लगभग 18 साल पहले दत्तू पांडुरंग भरतकर नामक एक व्यक्ति ने भी यहां जान दी थी। उसका शव बावड़ी में फंस गया था। बावड़ी से बदबू आने लगी थी। तत्कालीन पार्षद विट्ठलराव महाजन ने शव बाहर निकालने और बावड़ी की साफ-सफाई के लिए मनपा के सहयोग से 90 हजार रुपए खर्च किए थे। उस समय बावड़ी पर लोहे की जालियां और दरवाजे लगाए गए थे। इससे पूर्व 1965 में तत्कालीन पार्षद यादवराव देवगड़े ने बावड़ी पर पंप और चारों ओर नल लगवाए। इससे लोगों को भरपूर पानी मिलने लगा था। भरतकर का शव मिलने के बाद से लोगों ने यहां के पानी का इस्तेमाल करना बंद कर दिया। महाजन ने सफाई के बाद एक और नया पंप लगाया। कुछ साल बाद बावड़ी के पंप और मोटर गायब हो गए। लोगों ने यहां कचरा और गंदगी डालना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह बावड़ी कचराघर बन गई। पूर्व पार्षद विजय पखाले ने 2002 में बावड़ी बचाओ आंदाेलन और बाद में अनशन भी किया था। उस समय यहां तत्कालीन आयुक्त टी चंद्रशेखर, महापौर विकास ठाकरे एवं जलप्रदाय विभाग की टीम आयी थी। उन्होंने बावड़ी का मुआयना कर सफाई करवाने का आश्वासन दिया था। इस संबंध में फाइल भी बनकर तैयार हुई। बाद में संबंधित अधिकारियों ने मशीन से बावड़ी का पानी कम नहीं होने का हवाला दिया। इससे उन्हें सफाई करने में दिक्कतें आ रही थी। बाद में इसकी ओर दोबारा किसी ने नहीं देखा।

कमेंट करें
gNx21