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रकम डबल करने के चक्कर में गंवाई मेहनत की कमाई, करोड़ों से ठगे गये निवेशक

रकम डबल करने के चक्कर में गंवाई मेहनत की कमाई, करोड़ों से ठगे गये निवेशक

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जल्दी पैसा कमाने और अपनी पूंजी को डबल करने के चक्कर में दिल्ली के बाद नागपुर के लोगों के साथ भी बाइक बोट में निवेश के नाम पर 85 लाख की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। कोतवाली पुलिस ने पीड़ित निवेशकों की शिकायत पर आरोपी कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया जाता है कि बाइक बोट योजना के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी किए जाने का मामला दिल्ली, गुजरात, मुंबई में पहले से चर्चित हो चुका है। अब इसके तार संतरा नगरी से भी जुड़ गए हैं। इसमें निवेश के नाम पर धोखा खाने वाले लोग एक, दो नहीं बल्कि लाखों हैं और वह भी मध्यमवर्गीय परिवार के, जिन्होंने अपना पेट काटकर पूंजी जोड़ी थी। हैरानी की बात यह है सभी ने अपनी मर्जी से ही ठगों की झोली में पैसे डाल दिए। हम बात कर रहे हैं चर्चित बाइक बोट घोटाले की। यह स्कीम चलाने वाली कंपनी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के खिलाफ दिल्ली, गुजरात, मुंबई  के बाद नागपुर में भी एफआईआर दर्ज हो गई है। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार मे. गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर लि. कंपनी ने `बाइक बोट' स्कीम अंतर्गत वर्ष में एक बार निवेश करो और महीने में दोगुना फायदा होने का लालच दिया। कंपनी ने बकायदा विज्ञापन भी किया। कंपनी ने नागपुर के 45 निवेशकों के साथ 85 लाख की धोखाधड़ी की। इस मामले में रमेश वराडे की शिकायत पर  कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार रमेश नथ्थूजी वराडे (44) बेसा रोड, घोगली निवासी ने थाने में शिकायत की है कि उक्त कंपनी ने बाइक बोट  स्कीम के अंतर्गत 45 लोगों के साथ 85 लाख रुपए की धोखाधड़ी की। योजना में मोटर साइकिल बुक करनी पड़ती थी। एक व्यक्ति ने खुद की पत्नी के नाम पर 14  मोटर साइकिल (दोपहिया) बुक किया था। उसने फायदे के लिए निवेश किया लेकिन उसे कोई फायदा नहीं मिला। उसने जो निवेश किया था, वह रकम भी वापस नहीं मिली। इस मामले में पीड़ित निवेशक रमेश वराडे की शिकायत पर उक्त कंपनी के  मालिक संजय भाटी के साथ 13 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। 

वराडे ने पुलिस को बताया कि उनके मित्र ने नागपुर में गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर लि. नामक कंपनी शुरू होने के बारे में जानकारी दी। कंपनी की स्थापना वर्ष 2010 में की गई और वर्ष 2017 में  कंपनी में `बाइक बोट' नामक योजना शुरू की। इस स्कीम के अंतर्गत एक वर्ष में 62 हजार 100  रुपए भरने थे। इसके बदले में एक माह में 9 हजार 765 रुपए मुनाफा मिलने का झांसा दिया जाता था। निवेश के माध्यम से एक दोपहिया वाहन बुक करानी पड़ती थी। बुक की गई  मोटर साइकिल कंपनी खुद किराए पर लेती थी। दोपहिया पर चालक की नियुक्ति करने , उसके वेतन, मेंटनेंस, बीमा सहित अन्य खर्च कंपनी करने का दावा करती थी। निवेशकों द्वारा मोटरसाइकिल बुक करने पर उन्हें  आईडी नंबर दिया जाता था। कंपनी ने इस तरह का गोरखधंधा शुरू कर रखा था। वराडे के साथ कई लोग लालच में फंसकर निवेश किया। एक निवेशक को एक जोड़ी को जोड़ने पर उसे साढ़े 4 हजार रुपए का बोनस देने का लालच दिया जाता था। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा पुलिस कर रही है।  

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