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एनसीपी नेता जुटे , सर्वे के आधार पर उम्मीदवार तलाशने की कवायद

एनसीपी नेता जुटे , सर्वे के आधार पर उम्मीदवार तलाशने की कवायद

डिजिटल डेस्क,नागपुर। विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही एनसीपी  विविध राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए अपनी रणनीति साफ नहीं कर रही है, लेकिन सर्वे के आधार पर विविध सीटों के लिए उम्मीदवार तलाशने का काम चल रहा है। जीत की संभावना वाले नेताओं को पार्टी लाइन से हटकर फोन किया जा रहा है। उन्हें चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है। इस बीच राज्य में आई बाढ़ का परिणाम अन्य दलों के साथ ही राकांपा पर भी पड़ा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राकांपा के वरिष्ठ नेता डटे हुए हैं। साथ ही विधानसभा क्षेत्र स्तर पर चुनाव कार्य की तैयारी भी की जा रही है। 

चयन प्रक्रिया पर ध्यान

सप्ताह भर पहले राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ हुई नेताओं की बैठक का हवाला देते हुए पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इस बार पार्टी ने सबसे पहले उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर ध्यान दिया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर राकांपा ने 144 सीटों पर प्रमुखता से तैयारी की है। इस बार विदर्भ की 18 सीटों पर सबसे अधिक जोर देने का प्रयास किया गया है। गाेंदिया, चंद्रपुर, गड़चिरोली, नागपुर जिले में राकांपा की चिह्नित सीटों पर दावेदारी नहीं छोड़ी जाएगी। कांग्रेस के साथ गठबंधन तय है। कांग्रेस के प्रभाव क्षेत्र में एनसीपी अधिक सीटें छोड़ सकती है। 

आगाज से अब तक

गौरतलब है कि 1999 में बनी राकांपा की राज्य की राजनीति में शुरुआत अच्छी रही है। पहले चुनाव में ही जीतकर वह राज्य की सत्ता मेें कांग्रेस की सहयोगी बनी थी। राज्य में विधानसभा की 288 सीटें हैं। 2004 के चुनाव में कांग्रेस व राकांपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने 157 व राकांपा ने 124 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे। 2009 में कांग्रेस के हिस्से में 170 व राकांपा के हिस्से में 113 सीटें आईं थीं। दोनों बार कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सत्ता में रहा। 2014 में गठबंधन टूटा। कांग्रेस ने 287 सीटों पर लड़कर 42 सीटें जीती। राकांपा 278 सीटों पर चुनाव लड़कर 41 ही जीत पाई। 

रणनीति जारी है

इस बार आरंभिक चुनाव रणनीति में यह माना जा रहा है कि प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व में वंचित बहुजन आघाड़ी भी कांग्रेस गठबंधन के साथ होगा। वंचित की ओर से विदर्भ में 12 सीटों पर अपनी दावेदारी की जा रही है। ये वे सीटें हैं, जहां राकांपा का प्रभाव रहा है। फिलहाल वंचित का कांग्रेस राकांपा से गठबंधन नहीं हुआ है। राकांपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण कुंटे पाटील ने कहा है कि चुनाव रणनीति पर लगातार कार्य चल रहा है। फिलहाल बाढ़ पीड़ितों की सहायता सबसे महत्वपूर्ण है। राकांपा के प्रमुख नेतागण सामाजिक कार्य में योगदान दे रहे हैं। सीट साझेदारी का मामला वरिष्ठ नेतागण तय करेंगे। यह सही है कि राकांपा ने अपने प्रभाव क्षेत्र की चिह्नित सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को जनसंपर्क बढ़ाने को कहा है। 

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