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साउंड पोल्यूशन रोकने नीरी ने तैयार किया नाॅइस एटीएम, मुंबई भेजे प्रस्ताव पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 11th, 2019 13:29 IST

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साउंड पोल्यूशन रोकने नीरी ने तैयार किया नाॅइस एटीएम, मुंबई भेजे प्रस्ताव पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के बाद ध्वनि प्रदूषण पर रोकथाम लगाने की कवायद के तहत राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नीरी और सीएसआईआर राज्य के 27 शहरों में ध्वनि प्रदूषण मानचित्र तैयार किया गया। नीरी को इस प्रोजेक्ट के लिए 2 करोड़ दिए गए हैं। कारणों की खोज के बाद नियंत्रण के लिए कदम उठाए जाने संबंधी कार्यों के लिए नीरी का अध्ययन संबंधी प्रस्ताव राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में धूल खा रहा है। नागपुर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रादेशिक अधिकारी राहुल वानखेड़े के अनुसार प्रस्ताव मुंबई भेज दिया गया है। मुंबई कार्यालय से संपर्क किए जाने पर इस बाबत कोई जानकारी नहीं मिली। 

साउंड पोल्यूशन की रोकथाम
शहरों में हॉर्न ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाने के प्रमुख कारणों में शामिल है। नीरी में हुए रिसर्च के अनुसार, हाॅर्न बजाने के कारण शहरी शोर में 2-5 डेसिबल की वृद्धि होती है। ध्वनि प्रदूषण के रोकथाम में हाॅर्न के आवाज की तीव्रता को कम करने से काफी हद तक मदद मिल सकती है। नीरी के क्लीयर टेक्नोलॉजी एंड मॉडलिंग डिवीजन वरिष्ठ वैज्ञानिक रितेश विजय इस दिशा में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार सुरक्षा की दृष्टि से हॉर्न की आवाज कम करना उचित नहीं है, इसलिए वे वाहन की गति के साथ हॉर्न की आवाज की तीव्रता को जाेड़ने के लिए डिवाइस बनाने में जुटे हैं। इस डिवाइस को बनाने के लिए ध्वनि प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों की जरूरत हैं। उन्होंने नॉइस एटीएम विकसित किया है। यह वाहन के इंजन में लगाया जा सकता है। यह डिवाइस बताएगा कि वाहन चालक ने कितनी बार हॉर्न बजाया। इस दिशा में आगे के कार्य के लिए बड़े स्तर पर डेटा संकलन की जरूरत है। आंकड़े जुटाने के लिए सड़कों के किनारे ध्वनि सेंसर चलाए जाने हैं। संबंधित अध्ययन के लिए नवंबर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रस्ताव भेज दिया गया है। 

कोर्ट कर चुका है नीरी के अध्ययन की प्रशंसा
ध्वनि प्रदूषण पर रोक-थाम के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर महाराष्ट्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व नीरी ने राज्य के प्रमुख शहरों के 24 महानगर पालिकाओं में नॉइस मैपिंग कर रिपोर्ट तैयार किया था। रिपोर्ट के सुझावों से प्रभावित कोर्ट ने नीरी के अध्ययन करने वाली टीम के सदस्य कोर्ट में उपस्थित रहने इस दिशा में आगे अध्ययन के बारे सूचित करने को कहा था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रदेशिक अधिकरी राहुल वानखेड़े के अनुसार संबंधित प्रस्ताव हमने मुख्य कार्यालय, मुंबई प्रेषित कर दी है।

यह हैं नियम
नॉइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स 2000 के अनुसार, हॉस्पिटल, शिक्षा संस्थान, न्यायालय और पुस्तकालयों से 100 मीटर के दायरे का क्षेत्र शांत क्षेत्र है। देश में शांत क्षेत्रों में दिन के समय शोर का स्तर 50 डेसिबल तक और रात में 40 डेसिबल तक निर्धारत मानकों के अनुरूप है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार विद्यालयों में इसका स्तर 35 डेसिबल से अधिक और अस्पतालों में 30 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए।

क्या है स्पीड बेस्ड हॉर्निंग
रितेश विजय के अनुसार, वाहनों के हाॅर्न से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए स्पीड बेस्ड हॉर्निंग कारगर साबित हो सकता है। वाहन चालकों को बगैर कारण हॉर्न बजाने की आदत होती है। खासकर चौराहों पर ट्रैफिक लाइट पर रुके वाहन चालक बेवजह हॉर्न बजाते हैं। उस जगह पर वाहनों के शोर और धुएं का प्रतिकूल असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। हॉर्न को स्पीड से जोड़े जाने से चौराहों पर जहां वाहन खड़े होंगे, ऊंची आवाज में हाॅर्न नहीं बजेगा। 

हॉर्न से ध्वनि प्रदूषण में 2-5 डेसिबल की वृद्धि 
वाहनों से होने वाला शोर ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख कारणों में है। करीब 50 फीसदी अर्बन शोर वाहनों से होता है। शहरों में होने वाले ध्वनि प्रदूषण में हॉर्न की भूमिका काफी ज्यादा है। नीरी में हुए रिसर्च के अनुसार, हार्न के कारण शहरी शोर में 2-5 डेसिबल की वृद्धि होती है। अध्ययन करने वाले रितेश विजय, वरिष्ठ वैज्ञानिक क्लीयर टेक्नोलॉजी एंड मॉडलिंग डिवीजन, नीरी के अनुसार अध्ययन में पाया गया कि शहर में कई जगहों पर ध्वनि प्रदूषण का स्तर 71.3 डेसिबल से 79.3 डेसिबल तक रिकार्ड हुआ, जाे कि तय मानक से ज्यादा है।

बहरेपन, हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापे का कारण बन सकता है ध्वनि
एनवायरनमेंट इंटरनेशनल नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ट्रैफिक के शोर को लंबे समय तक झेलने वाले लोग मोटापा का शिकार हो सकते हैं। शोर से तनाव बढ़ता है और नींद प्रभावित होती है। इससे हारमोन भी प्रभावित होते हैं और रक्तचाप बढ़ता है। नींद प्रभावित होने के साथ ही ग्लूकोज की कार्यप्रणाली में बाधा पड़ती है और भूख पर असर पड़ता है। शोर से कार्डियो-वैस्कुलर रोग और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। जर्नल ऑक्यूपेशनल एंड एनवायर्नमेंटल मेडिसिन के अंक में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, रात में वायुयान के शोर में लंबे समय तक बने रहने से उच्च रक्तचाप और हार्ट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यह प्रभाव बुजुर्गों पर अधिक पड़ता है। साल 2016 में नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने ट्रैफिक के शोर को हार्ट अटैक से जोड़ा था। 
 

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