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मोतियाबिंद के ऑपरेशन में लापरवाही, दो लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश

मोतियाबिंद के ऑपरेशन में लापरवाही, दो लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। जिला उपभोक्ता फोरम क्रमांक-2 ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन में लापरवाही करने पर डॉक्टर और बीमा कंपनी को आदेशित किया है कि दो महीने में मरीज को दो लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति दिए जाए। फोरम के अध्यक्ष केके त्रिपाठी, सदस्य योमेश अग्रवाल और अर्चना शुक्ला ने मरीज को पांच हजार रुपए वाद व्यय के लिए देने का आदेश दिया है। 

ऑपरेशन के दूसरे दिन से तकलीफ होने लगी 

महानद्दा निवासी 38 वर्षीय तेजीलाल यादव की ओर से दायर प्रकरण में कहा गया कि उसने 17 दिसंबर 2011 को नेपियर टाउन निवासी डॉ. नवजोत अहलूवालिया से फेको विधि से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। उसे ऑपरेशन के दूसरे दिन से तकलीफ होने लगी तो डॉक्टर को आंख दिखाई। डॉक्टर ने उसे आंख में दवा डालने के दी। वह एक माह तक दवा डालता रहा, लेकिन उसे आराम नहीं लगा। 24 जनवरी 2012 को डॉक्टर ने उसे पत्र देकर शंकर नेत्रालय चैन्नई भेजा। शंकर नेत्रालय में उसका पुन: ऑपरेशन कर बताया गया कि पहले ऑपरेशन में लापरवाही की वजह से उसकी आंख पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती है। उसने डॉक्टर और बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति की मांग की, लेकिन दोनों ने इनकार कर दिया। अधिवक्ता आशीष मिश्रा के तर्क दिया कि ऑपरेशन में लापरवाही की गई है। सुनवाई के बाद फोरम ने डॉक्टर और दी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को मरीज को दो लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।

शहडोल कलेक्टर और धनपुरी नगर पालिका के सीएमओ हाजिर होने का आदेश

हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा नहीं दिए जाने के मामले में शहडोल कलेक्टर और धनपुरी नगर पालिका के सीएमओ को 17 जुलाई को हाईकोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अंजुली पालो की युगल पीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद यह निर्देश जारी किए है।शहडोल बुढार निवासी पूर्व विधायक छोटेलाल सरावगी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि धनपुरी नगर पालिका ने उनकी जमीन का बिना अधिग्रहण किए सार्वजनिक सड़क का निर्माण कर दिया था। इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका में निर्णय दिया कि सार्वजनिक सड़क को बंद नहीं किया जा सकता है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने जमीन के मुआवजे के लिए आवेदन दिया, लेकिन नगर पालिका ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। अधिवक्ता संजीव तुली ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक सड़क को बंद नहीं किया जा सकता है। ऐसे में याचिकाकर्ता अपनी जमीन का मुआवजा पाने का अधिकारी है, लेकिन नगर पालिका द्वारा उसे मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। सुनवाई के बाद युगल पीठ ने शहडोल कलेक्टर और धनपुरी नगर पालिका को 17 जुलाई को हाजिर होने का आदेश दिया है।
 

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