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नेपाल के आर्मी चीफ को मिली भारतीय सेना के जनरल की उपाधि

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 13th, 2019 17:06 IST

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News Highlights

  • नेपाल के आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा को 'भारतीय सेना के जनरल' की उपाधि दी गई।
  • पदवी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दी।
  • दोनों देशों के बीच सेना प्रमुख को मानद पदवी प्रदान करने की परंपरा पुरानी है।


डिजिटल डेस्क, मुंबई। नेपाल के आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा को  'भारतीय सेना के जनरल' की उपाधि दी गई है। ये मानद पदवी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दी। थापा ने पिछले साल सितंबर में नेपाल सेना की कमान का कार्यभार संभाला था। दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के सेना प्रमुख को मानद जनरल की पदवी प्रदान करने की परंपरा पुरानी है। इससे पहले भारतीय सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को 2017 में नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने 'नेपाली सेना के जनरल' की मानद उपाधि प्रदान की थी। आपको बता दें नेपाल के सेना अध्यक्ष चार दिवसीय भारत यात्रा पर है। यात्रा शनिवार को शुरू हो चुका है, इस दौरान ही उन्हें उपाधि दी गई। वो द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ व्यापक बातचीत भी करेंगे।

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वर्षों पुरानी परंपरा का पालन करते हुए नेपाल के सेना प्रमुख को 'भारतीय सेना के जनरल' की मानद पदवी प्रदान की जाएगी। दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के सेना प्रमुख को मानद जनरल की पदवी प्रदान करने की पुरानी परंपरा है। भारतीय सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को 2017 में नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने 'नेपाली सेना के जनरल' की मानद पदवी प्रदान की थी।

कमांडर इन चीफ जनरल केएम करियप्पा 1950 में नेपाल की सेना द्वारा इस पदवी से विभूषित किए जाने वाले पहले भारतीय सेना प्रमुख थे। जनरल थापा की यात्रा पर भारतीय सेना ने कहा, 'यह यात्रा दोनों सेनाओं के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है। ये दोनों सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने का मंच प्रदान करेगी।' जनरल थापा जयपुर और लखनऊ में भारतीय सेना के प्रतिष्ठानों का भी दौरा करेंगे।


 

इन पदों पर रह चुके हैं थापा

1980 में नेपाली सेना में शामिल हुए थापा भारत में राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज और नेपाल के 'सैन्य कमान एवं स्टाफ कॉलेज' से ग्रैजुएट हैं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय (नेपाल) से स्नातक की डिग्री लेने के अलावा उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में मास्टर की डिग्री ली है। उन्होंने 39 वर्ष के अपने सेवाकाल के दौरान इन्फैंट्री बटालियन, इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली और वैली डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग तथा सैन्य मुख्यालय में सैन्य सचिव के पद पर रहे। विदेश सेवा के तहत उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले गोलान पहाड़ी, लेबनान और पूर्व युगोस्लाविया में सेवा दी।

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