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कोयले का काफी स्टॉक, WCL पर आधारित कोई भी उद्योग बंद नहीं हो सकते : मिश्र

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 13th, 2018 17:49 IST

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कोयले का काफी स्टॉक, WCL पर आधारित कोई भी उद्योग बंद नहीं हो सकते : मिश्र

डिजिटल डेस्क, नागपुर। WCL (वेस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड) के पास कोयले का काफी स्टॉक है इसलिए इस पर आधारित कोई भी उद्योग बंद नहीं हो सकता। यह विश्वास डब्लूसीएल के सीएमडी राजीव रंजन मिश्र ने व्यक्त किया। गुरुवार को दैनिक भास्कर कार्यालय में संपादकीय सहयोगियों के साथ विशेष चर्चा में उन्होंने यह बात कही। श्री मिश्र ने बताया कि वेकोलि अब तक 46 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य पूरा कर चुकी है। मार्च 2019 तक कंपनी 55 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त कर लेगी। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कंपनी ने मिशन 2.0 शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि इस मिशन को सफल बनाने के लिए तीन महीने में 70 से 80 हजार लोगों से संपर्क किया गया। मिशन के माध्यम से WCL अपने बेस को मजबूत बनाना चाहती है। 1 अप्रैल 2019 को इसके परिणाम सामने आएंगे। जो बहुत ही सकारात्मक रहेंगे। इस अवधि तक 1500 करोड़ रुपए के प्राफिट का टारगेट रखा गया है। जिसमें से 165 करोड़ का प्राफिट अब तक दर्ज किया जा चुका है।

विदर्भ में WCL का होना बहुत जरूरी
श्री मिश्र ने WCL को विदर्भ की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि यहां इस कंपनी का होना बहुत जरूरी है। मध्यभारत में केवल विदर्भ में ही कोयले का भंडार है। अन्य राज्यों से कोयला महंगी दर पर खरीदना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अन्य क्षेत्रों के मुकाबले विदर्भ में कोयला निकालने का खर्च अधिक है। यहां अंडरग्राउंड माइंस बहुत ज्यादा है। विदर्भ में एक फीट कोयला निकालने के लिए आठ फीट मिट्‌टी को हटाना पड़ता है जबकि महानदी में केवल 1 फीट मिट्‌टी हटानी पड़ती है। इसीलिए वहां पर इसके पीछे प्रोडक्शन 350 रुपए है जबकि हमारे यहां 1700 रुपए। प्रोडक्शन कॉस्ट के मुकाबले बिक्री की दर बहुत कम होने के कारण ही वेकोलि को नुकसान झेलना पड़ता है।

वर्ष 2009 कंपनी के लिए नुकसानभरा रहा
उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 कंपनी के लिए नुकसान भरा रहा। इस साल उमरेड खदान बंद हो गई। इससे कोयले का उत्पादन प्रभावित हुआ। इसके बाद हर साल कंपनी को लॉस होता गया। जब उन्होंने वेकोलि के सीएमडी का पदभार ग्रहण किया तब कंपनी का टर्न ओवर 3800 मिलियन टन प्रति वर्ष था। कंपनी लगातार नुकसान में जा रही थी। इसे रोकने के लिए उन्होंने उस समय कई डिसिजन लिए। नई खदानें शुरू की गई। हर महिने एक खदान खोलने के लक्ष्य के साथ 19 महिने में 19 खदानें खोली गई। 2016-17 में कंपनी नुकसान में रही।

वेकोलि के पास 14 मिलियन टन कोयले का स्टॉक जमा हो गया था। इसे बेचने के लिए एक मार्केटिंग टीम बनाई गई, जिसके माध्यम से कोयले की मार्केटिंग की गई और कंपनियों के पास जाकर कोयला बेचा गया। यह स्थिति 2017-18 तक बनी रही। इसके बाद अचानक बिजली कंपनियों द्वारा कोयले की मांग बढ़ गई। महाजेनको को इस साल 1400 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। श्री मिश्र ने बताया कि अब वेकोलि के पास कोयला खरीदनेवाले ग्राहकों की कमी नहीं है। 2019 में 50 मिलियन कोयले के प्रोडक्शन और 60 मिलियन टन डिस्पैच करने का टारगेट रखा गया है।

पाइप कन्वेयर से कोयला भेजने वाला विश्व का पहला देश होगा भारत
वेकोलि पहले खापरखेड़ा पावर प्लांट को बस एवं ट्रकों से कोयला भेजती थी अब कंपनी पाइप कन्वेयर से कोयला भेजने की योजना शुरू करने जा रही है। आने वाले कुछ महिनों में चंद्रपुर खदान में भी यह सेवा शुरू हो जाएगी।

आय बढ़ाने बेच रहे पानी और रेत
उन्होंने बताया कि विदर्भ के लोगों की जरूरतों को पूरा करने और कंपनी की आय बढ़ाने के लिए खदानों से निकलनेवाले पानी और रेत को बेचा जा रहा है। खदानों के पानी को फिल्टर कर बेचा जा रहा है। इसके लिए माइन बोतल शुरू की गई है। बोतल की कीमत फिलहाल 8 रुपए रखी गई है। जल्द ही इसे 5 रुपए तक लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उसी प्रकार रेत भी बेची जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बननेवाले घरों के लिए 160 रुपए क्यूबिक मीटर के हिसाब से रेत दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वेकोलि के पास रेत का भरपूर स्टॉक है। इस स्टॉक से पूरे विदर्भ की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। अगले महिने से कमर्शियल तौर पर रेत की बिक्री शुरू की जा रही है। ग्राहकों को 750 रुपए क्यूबिक मीटर के हिसाब से रेत बेची जाएगी। इसके लिए भानेगांव में प्लांट लगाया गया है। अगले महिने से नीलामी प्रक्रिया भी शुरू होगी। रेत की बिक्री कर इस साल 100 करोड़ रुपए की आय का टारगेट रखा गया है।

 

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