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मोबाइल की रोशनी में होते है दफ्तर के काम - कलेक्ट्रेट की बदहाल व्यवस्था

मोबाइल की रोशनी में होते है दफ्तर के काम - कलेक्ट्रेट की बदहाल व्यवस्था

डिजिटल डेस्क,कटनी। मौसम में बदलाव के साथ बिजली गुल की समस्या से आप कई बार जूझते हैं,यह समस्या उन्हीं घरों और शासकीय दफ्तरों में अधिक होती है, जहां पर इन्वर्टर, जनरेटर या फिर अन्य इमरजेंसी साधन नहीं होते, पर यह समस्या उस परिसर में भी हो सकती है। जिस परिसर में लाखों रुपए के जनरेटर के साथ सोलर पैनल भी लगे हों साथ ही जिसे आईएसओ का तमगा मिलने के साथ 5-एस अवार्ड से भी नवाजा गया हो। यह दास्तां किसी ग्रामीण अंचल या फिर जिले के अन्य विभागों का नहीं है। यह कहानी उस कलेक्ट्रेट परिसर की है। जिस परिसर में कलेक्टर जैसे बड़े साहब बैठते हों। दरअसल गुरुवार दोपहर बारिश के चलते 3 बजकर 50 मिनट में कलेक्ट्रेट की बिजली चली गई। जिस समय बिजली गई, उस समय अधिकारी और कर्मचारी आफिस में बैठकर आवश्यक काम-काज निपटा रहे थे। दस मिनट तक वे तो बिजली आने का इंतजार करते रहे। इसके बाद जब बिजली नहीं आई, तब मोबाइल की ही रोशनी से अफसर और कर्मचारी काम करते हुए दिखाई दिए।

इस तरह से रहा नजारा

बारिश के चलते अंधेरा छा गया। बिजली गुल होने के पहले जहां कार्यालय में बैठकर कर्मचारी काम-काज निपटा रहे थे। वहीं बिजली जाने के बाद कई कर्मचारी निकलकर बरामदे में आ गए। कक्ष क्रमांक 17 में एक तरफ टेबल में बैठकर मोबाइल की रोशनी से कर्मचारी काम निपटा रहे थे। संयुक्त कलेक्टर सपना त्रिपाठी के चैम्बर में भी कर्मचारियों और अधिकारियों की भीड़ लगी रही। यहां पर भी मोबाइल का ही रोशनी सहारा बना हुआ था। कुर्सी मेें बैठकर जहां अधिकारी अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के फाईलों को देख रहीं थी। वहीं यहां पर मोबाइल की रोशनी में अधिकारी और कर्मचारी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थें, और कुछ विभाग ऐसे भी रहे। जहां के कर्मचारी बाहर बरामदे में आकर बिजली आने का इंतजार करते रहे। बीस से पच्चीस मिनट बाद जब बिजली आई। तब वे फिर से काम-काज में जुटे।

सुविधा के बाद  भी अंधेरा

यहां पर सुविधा के नाम से शासन ने वह सब कुछ दिया है। जिसकी जरुरत इस कलेक्ट्रेट को रही। यहां पर जनरेटर के अलावा कलेक्ट्रेट के छत में सोलर पैनल भी लगा हुआ है। इसके बावजूद यहां की बिजली व्यवस्था भगवान भरोसे ही है। जब तक बिजली विभाग की लाईन चालू रहती है, तब तक तो यहां पर सभी विभागों में बिजली जलती रहती है। लेकिन जैसे ही बिजली चली जाती है। अंधेरे की आगोश में पूरा परिसर ही डूब जाता है। यह कहानी किसी एक समय की नहीं बल्कि बिजली गुल होने पर हर बार यहां पर दोहराई जा रही है।

आईएसओ से प्रमाणित

सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के लिए कलेक्ट्रेट को करीब दो वर्ष पहले आईएसओ से भी प्रमाणित किया जा चुका है। इसके अलावा इसे 5-एस अवार्ड से भी नवाजा गया है। करीब दो वर्ष पहले नवंबर माह में यह पुरुस्कार दिया गया था। जिस पर तत्कालीन कलेक्टर ने इसका श्रेय पूरी टीम को दिया था। अब फिर से यहां पर व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। पहले अग्निशमन यंत्रों को समय पर रिफीलिंग नहीं कराने को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर चर्चा में रहा। अब अंधेरा होने पर फिर से जिले का यह कार्यालय चर्चाओं में व्याप्त रहता है।

इनका कहना है

कलेक्ट्रेट में बिजली जाने पर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में जनरेटर और सोलर पैनल भी लगा हुआ है जो चालू हालत में है। कर्मचारी को कहा गया है कि जब बिजली गुल हो तो इसे चालू कर दिया करें। -पी.के. श्रीवास्तव, अधीक्षक कलेक्ट्रेट

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