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चल रहा था ऑनलाइन दान का खेल, मां शारदा इंटरप्राइजेज को नोटिस

BhaskarHindi.com | Last Modified - March 15th, 2019 14:27 IST

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चल रहा था ऑनलाइन दान का खेल, मां शारदा इंटरप्राइजेज को नोटिस

डिजिटल डेस्क,सतना। शक्तिपीठ मां शारदा की वेबसाइट का संचालन करने वाली एक प्राइवेट फर्म ने ऑनलाइन दान का खेल खेलना शुरू कर दिया। ऑनलाइन दान लेने के संबंध में संबंधित फर्म और मां शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति मैहर के बीच ऐसा कोई भी लिखित करार नहीं हुआ है। हालांकि फर्म का कहना है कि ऑनलाइन दान लेने के लिए तत्कालीन एसडीएम और समिति के प्रशासक ने मौखिक तौर पर स्वीकृति प्रदान की थी। दैनिक भास्कर में 13 मार्च को प्रकाशित दान के खाते में सेंध शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद समिति ने मां शारदा इंटरप्राइजेज कारण बताओ नोटिस थमाया है।
क्या है मामला
दरअसल, मैहर में मां शारदा के मंदिर परिसर में सैकड़ों क्यूआर कोड वाले स्टीकर लगाए गए थे। इस क्यूआर कोड को स्केन कर आप मंदिर की व्यवस्थाओं को संभालने वाली समिति को यथासंभव दान कर सकते हैं। प्रथम दृष्टया यह लगा कि पेटीएम क्यूआर कोड के स्टीकर लगाए गए हैं मगर मां शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति को लिखे एक पत्र से सारा किस्सा समझ में आ गया कि यह पेटीएम के स्टीकर नहीं बल्कि समिति की वेबसाइट बनाने वाली मां शारदा इंटरप्राइजेज का किया धरा है।
420 का प्रकरण दर्ज करने की चेतावनी
समिति ने फर्म को नोटिस देते हुए कहा कि आपको वेबसाइट संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी न कि ऑनलाइन दान लेने की। दान के लिए क्यूआर कोड क्यों लगाए गए इस बात की जानकारी भी तलब की गई है। समिति प्रशासक हेमकरण धुर्वे ने दो टूक कहा कि प्रबंध समिति को अंधेरे में रखकर दान की राशि स्वयं के खाते में श्रद्धालुओं से ली गई जिसका अधिकार आपको नहीं है। जिसके कारण आपके विरुद्ध 420 का प्रकरण बनता है। ऐसा न करने पर समिति ने वैधानिक कार्यवाही की चेतावनी दी है। समिति भी चकरा गई थी और कह दिया था कि ऑनलाइन दान के लिए लगाए गए पेटीएम के क्यूआर कोड उसकी जानकारी में नहीं है।
मौखिक करार का वास्ता
खबर प्रकाशित होने के बाद मां शारदा इंटरप्राइजेज ने समिति को सफाई दी कि चूंकि मंदिर की सेवाओं को ऑनलाइन करने का काम उनकी फर्म को मिला है जिसके अंतर्गत ऑनलाइन दान की सुविधा प्रदान करने का काम भी शामिल है। यह सुविधा आसानी से दर्शनार्थियों तक पहुंचाने के लिए इस वेबसाइट का क्यूआर कोड बनाकर मंदिर परिसर में लगाया गया है। इससे पेटीएम से कोई लेना देना नहीं है। हालांकि समिति ने 27 सितम्बर 2018 को जो पत्र फर्म को लिखा उसके मुताबिक पहले एनआईसी के जरिए समिति की वेबसाइट बनाई जानी थी मगर फर्म ने वेबसाइट के निर्माण में अत्याधिक खर्च का हवाला दिया जिसके एवज में प्रशासक ने मां शारदा इंटरप्राइजेज को वेबसाइट कार्य करने की अनुमति दे दी।
फिर दान समिति के खाते में क्यों नहीं
अब लाख टके का सवाल यह उठता है कि जब वेबसाइट बनाने वाली फर्म इस बात का दावा कर रही है कि दान के लिए क्यूआर कोड उसने लगवाए हैं तो फिर उस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जो दान किया जाता है वह मां शारदा इंटरप्राइजेज के खाते में जाता है। इसके लिए समिति का बैंक एकाउंट मर्ज क्यों नहीं किया गया। फर्म को वेबसाइट के संचालन का काम मिला है उस आदेश में ऑनलाइन दान संबंधी किसी भी करार का उल्लेख नहीं है।

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