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ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियां लगा रही ग्राहकों को डिस्काउंट की लत

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 09th, 2019 23:16 IST

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ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियां लगा रही ग्राहकों को डिस्काउंट की लत

News Highlights

  • ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियों के प्रतिनिधियों और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच बैठक हुई।
  • इस बैठक में ई-कॉमर्स पर सरकार की नई एफडीआई नीति का भी मुद्दा उठाया गया।
  • बैठक में रेस्टोरेंट मालिकों ने कहा कि उनकी ओर से दिया जा रहा बड़ा डिस्काउंट ग्राहकों में छूट को लेकर लत की स्थिति पैदा कर रहा है।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियों के ऑफर्स से ग्राहकों की डिस्काउंट की लत लग रही है। क्या इन ऑफर्स का प्रभाव रेस्टोरेंट संचालकों पर पड़ रहा है। क्या डिस्काउंट की वजह से रेस्टोरेंट में जाने वाले ग्राहकों की संख्या घट रही है। इन्हीं सब सवालों को लेकर ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियों के प्रतिनिधियों और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में ई-कॉमर्स पर सरकार की नई एफडीआई नीति का भी मुद्दा उठाया गया। बैठक में रेस्टोरेंट मालिकों ने कहा कि उनकी ओर से दिया जा रहा बड़ा डिस्काउंट ग्राहकों में छूट को लेकर लत की स्थिति पैदा कर रहा है। 

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के प्रसिडेंट राहुल सिंह ने कहा पहली टास्कफोर्स मीटिंग में भारी डिस्काउंट्स को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इस बात की कोई शंका नहीं है कि ऊबर ईट्स, जोमैटो, स्विगी और फूड पांडा जैसी ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियों ने ग्राहकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से रेस्टोरेंट के करीब लाने का काम किया है। लेकिन ऑनलाइन कंपनियों के ऑफर ग्राहकों को डिस्काउंट एडिक्ट बना रहे हैं। उन्होंने कहा, कोई भी कारोबारी कॉम्पिटिशन में बढ़त के लिए ग्राहकों को नुकसान में सामान नहीं बेच सकता।  सिंह ने कहा, 'रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में लाखों छोटे व्यवसाय हैं, जो ज्यादातर छोटे और पारिवारिक उद्यमियों द्वारा चलाए जाते हैं, उनके हितों को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है।'

फिलहाल यह देखा जाना बाकी है कि छूट के तरीकों में बदलाव का भारत के ऑनलाइन फूड डिलिवरी मार्केट पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जो कि डिजिटाइजेशन के कारण तेज गति से बढ़ रहा है। ये फूड ऑर्डरिंग और डिलीवरी स्टार्टअप भारतीय और विदेशी कंपनियों के फंड को आकर्षित कर रहे हैं। स्विगी ने हाल ही में नैसपर्स और चीन के टेनसेंट से 100 करोड़ डॉलर का फंड रेज किया है। जबकि जोमैटो ने  400 मिलियन डॉलर का फंड जुटाने के लिए फर्मों के साथ बातचीत कर रहा था। 

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