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'जींस पहनने वाली और मोबाइल रखने वाली लड़कियां भाग जाती हैं'

April 18th, 2018 15:25 IST
'जींस पहनने वाली और मोबाइल रखने वाली लड़कियां भाग जाती हैं'

डिजिटल डेस्क, सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत के ईशापुरी खेड़ी गांव में पिछले एक साल से लड़कियों के जींस पहनने पर पाबंदी लगाई गई है। साथ ही लड़कियों को मोबाइल फोन रखने की भी मनाही है। दरअसल, ये फरमान गांव की पंचायत ने सुनाया है। इसके पीछे पंचायत का मानना है कि जींस पहनने वाली और मोबाइल फोन रखने वाली लड़कियां घर से भाग जाती हैं। लिहाजा इन दोनों पर पंचायत ने पाबंदी लगा रखी है। इसपर गांव की लड़कियों का मानना है कि कपड़ों से कोई कैसे लड़की के कैरेक्टर पर फैसला ले सकता है।

गांव के सरपंच ने क्या कहा?

इस मामले में ईशापुरी खेड़ी गांव के सरपंच प्रेम सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा 'हमने पिछले एक साल गांव में लड़कियों के जींस पहनने पर बैन लगाया हुआ है। इसके साथ ही हमने उनके मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर भी रोक लगाई है, ताकि वो इसका गलत इस्तेमाल न कर सकें।' सरपंच ने बताया 'पहले गांव में लड़कियां जींस-टीशर्ट पहनकर और मोबाइल फोन लेकर बाहर पढ़ने जातीं थीं, लेकिन इस फरमान के बाद अब लड़कियां मोबाइल फोन लेकर अपने साथ नहीं जाती। इस फरमान के बाद ऐसे मामलों में कमी आई है।'

क्यों लगाई गई है ये पाबंदी?

बताया जा रहा है कि गांव में 2-3 बार कुछ ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिनमें लड़कियां अपने प्रेमी के साथ भाग गईं। इससे पंचायत की बदनामी हुई। जिसके बाद पंचायत ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल फोन रखने पर पाबंदी लगाने का फरमान जारी कर दिया। इसके पीछे ये भी कहा गया कि इससे गांव की संस्कृति और पहनावे की गरिमा बरकरार रहेगी। बताया जा रहा है कि इस फरमान के बाद से लड़कियां भी इसका सख्ती से पालन कर रही हैं।

लड़कियों का क्या है कहना?

वहीं पंचायत के इस फरमान को गांव की लड़कियों ने गलत ठहराया है। ईशापुरी खेड़ी गांव की एक लड़की ने मीडिया से बातचीत में कहा 'ये बिल्कुल गलत है। ये आदमियों की मानसिकता है, इसमें कपड़ों की कोई गलती नहीं। आप कपड़ों से किसी लड़की के कैरेक्टर पर कैसे फैसला कर सकते हैं।' इसके साथ ही गांव के पास गांव की लड़कियों ने पंचायत के इस फैसले को गलत बताया है। पास के ही गांव की कुछ लड़कियों का कहना है कि 'किसी भी पंचायत को हक नहीं है कि वो किसी पर रोक लगाए। इस तरह की पंचायतों को अपनी सोच बदलने की जरूरत है, क्योंकि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं हैं।'
 

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