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पारडी ब्रिज : 500 करोड़ के प्रोजेक्ट में सामने आ रही खामियां

पारडी ब्रिज : 500 करोड़ के प्रोजेक्ट में सामने आ रही खामियां

डिजिटल डेस्क, नागपुर। केंद्र में मंत्री बनने के बाद नितीन गडकरी शहर के लिए पहला बड़ा प्रोजेक्ट पारडी-कलमना ओवरब्रिज लेकर आए। 500 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की राह में अभी भी कई रोड़े बने हुए हैं। एनएचए जहां एक-एक रोड़ा दूर करने में लगा है, वहीं संबंधित एजेंसियां राहत व मदद करने के बजाय खामियां गिनने में लगी हुई हैं। प्रोजेक्ट के लिए मनपा की तरफ से कभी जगह नहीं मिलती, तो कभी निधि की व्यवस्था नहीं की जाती। प्रोजेक्ट में हो रही देरी से कभी नेता उखड़ जाते हैं, तो कभी राजनीतिक रसूख रखनेवाला ठेकेदार आंख दिखाता है। इस बीच प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हुआ और इसकी समय सीमा बढ़ाकर दिसंबर 2020 कर दी गई। 

कोई न कोई कारण आता ही है सामने

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने पारडी-कलमना ब्रिज एनएचए से बनवाने का निर्णय लिया था। जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी मनपा की थी। इसी तरह जमीन अधिग्रहण व अन्य खर्चों के लिए 80 करोड़ की राशि मनपा देनेवाली थी। मनपा आज तक जमीन एनएचए को नहीं दे सकी। मनपा निधि देने में विफल रही तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिलचस्पी लेकर 80 करोड़ देने का निर्णय लिया, लेकिन अभी तक पूरी निधि नहीं मिल सकी है। निर्माण कार्य का ठेका मुंबई की कंपनी को मिला है और नेता की कंपनी इसमें भागीदार है। ठेकेदार जमीन नहीं मिलने का कारण सामने कर काम रोक देता है। क्षेत्र के विधायक कृष्णा खोपड़े यहां का काम कछुआ गति से चलने की शिकायत कई बार केंद्रीय मंत्री गडकरी से कर चुके हैं। एनएचए की अवस्था इधर खाई, उधर कुआं जैसी हो गई है। एनएचए न मनपा को कुछ बोल सकती न ठेकेदार को। जमीन व निधि नहीं मिलने से यह प्रोजेक्ट जुलाई 2018 तक पूरा नहीं हो सका और अब इसकी मियाद दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी गई है।

ठेकेदार नाकारा साबित हुआ 

ठेकेदार काम के मामले में नाकारा साबित हुआ है। ढाई साल में बननेवाला प्रोजेक्ट जुलाई 2019 में पूरा नहीं हुआ। अब इसकी मियाद दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी गई है। ठेकेदार व एनएचए की शिकायत कई बार मंत्री गडकरी से की। मेट्रो रेल का विस्तार कापसी उमिया धाम तक होने से ब्रिज की डिजाइन बदली और प्रोजेक्ट में देरी हुई। एनएचए भी ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं करती। ब्रिज के नीचे का रास्ता तुरंत बनना चाहिए।  -कृष्णा खोपड़े, भाजपा विधायक पूर्व नागपुर. 

देरी के कई कारण, पर अब काम पटरी पर 

देरी के कई कारण हैं। कभी मनपा की तरफ से जमीन नहीं मिलती तो कभी तय निधि नहीं मिलती। मनपा ने अब एक महीने में जमीन अधिगृहीत कर एनएचए काे सौंपने का वादा किया है। 80 करोड़ में से कुछ निधि अभी प्राप्त हुई है। करार में तय पूरी जमीन नहीं सौंपने से ठेकेदार काम में लापरवाही करता है। ब्रिज के नीचे के रास्ते के लिए अब कम जमीन मिलेगी। अब काम पटरी पर आ गया है। कलमना ब्रिज के नीचे का एक रास्ता 3 सप्ताह बाद आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। 
-चंद्रशेखर, प्रोजेक्ट आफिसर, एनएचए नागपुर विभाग नागपुर. 

3 मीटर की जगह 2 मीटर जगह अधिगृहीत होगी  

इस प्रोजेक्ट के लिए पुराना भंडारा रोड पर सड़क किनारे की 3-3 मीटर की जरूरत थी। मनपा ने यह जिम्मेदारी पूरी नहीं की। इसमें एक बड़े उद्यमी की भी जगह जा रही है। अंतत: यह फैसला हुआ कि 3 की जगह 2-2 मीटर जमीन अधिगृहीत की जाएगी। नेता ने इसमें विशेष दिलचस्पी ली। मनपा ने एक माह में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा एनएचए को दिया है।  
 

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