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पौष पुत्रदा एकादशी 29 को, संतान की है कामना तो ऐसे रखें व्रत

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 20th, 2017 06:13 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पौष पुत्रदा एकादशी साल 2017 का अंतिम एकादशी व्रत। एकादशी या ग्यारस एक महत्वपूर्ण तिथि मानी गई है। हर माह दो एकादशी होती हैं। प्रत्येक पक्ष की एकादशी का अलग महत्व एवं मान्यताएं हैं। इस व्रत को बड़ी ही श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ रखा जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि सभी व्रतों में एकादशी सबसे प्राचीन व्रत है। इस  बार यह 29 दिसंबर 2017 शुक्रवार काे पड़ रही है।

स्वयं महादेव ने बताया महापुण्यदायिनी 

पद्म पुराण में भी इस व्रत का महत्व बताया गया है। स्वयं महादेव ने नारद जी को उपदेश देते हुए एकादशी को महापुण्यदायिनी बताया था। कहा जाता है कि जो भी भी व्यक्ति ये व्रत रखता है उसके पूर्वज कुयोनि को त्याग स्वर्ग की ओर प्रस्थान करते हैं। इसका पुण्य पूर्वजों की उन आत्माओं को भी मिलता है जो अतृप्त हैं। 

व्रत के देवता विष्णुदेव

भगवान कृष्ण ने पुत्रदा एकादशी के महत्व को बताया है कि इस व्रत के देवता विष्णुदेव हैं, जो भी व्यक्ति  संतान सुख की कामना रखता है उसे पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत अवश्य ही धारण करना चाहिए। व्रतधारी को एक दिन पूर्व अर्थात दशमी के दिन ही लहसुन व प्याज का त्याग कर देना चाहिए

द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व ही पारण 

एकादशी व्रत का सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। इसका पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व ही कर लेना चाहिए। ऐसा ना करने पर पुण्य की बजाए पाप का भागी होता है। एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करने का नियम है। 

दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन  

सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति की कामना करने वालों को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं। इस दिन अपना पूरा ध्यान व्रत, साधना, हरि भजन और भक्ति में लगाना चाहिए। रात में जागरण कर हरि भजन करना उत्तम बताया गया है। एेसा करने पर आपके कर्माें का पूरा पुण्य भगवान विष्णु की कृपा से आपके पूर्वजों काे प्राप्त हाेता है 

ये है शुभ मुहूर्त

-एकादशी तिथि प्रारम्भ- 29 दिसम्बर 2017 को 12:16 बजे
-एकादशी तिथि समाप्त- 29 दिसम्बर 2017 को 21:54 बजे

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