comScore
Dainik Bhaskar Hindi

बप्पा से मेघा बरसाओ की प्रार्थना, घर घर विराजे प्रथम पूज्य, नहीं हुई वर्षा तो बिगड़ेंगे हालात

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 13th, 2018 18:10 IST

1.1k
0
0
बप्पा से मेघा बरसाओ की प्रार्थना, घर घर विराजे प्रथम पूज्य, नहीं हुई वर्षा तो बिगड़ेंगे हालात

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा। आज घर - घर में प्रथम पूज्य भगवान गणेश की स्थापना हो रही है। इसी के साथ यहां के लोग उनसे पानी बरसाने की भी प्रार्थना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सावन दगा दे गया। भादों भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। मौसम के जानकारों और वैज्ञानिकों के सारे अनुमान धरे रह गए। जिले में अब भी तेज बारिश का बेसब्री से इंतजार है। कुल 1050 मिलीमीटर औसत वर्षा वाले जिले में अब तक रिमझिम तरीके से बारिश का आंकड़ा बमुश्किल 700 एमएम तक पहुंच पाया है। इसे आधी बारिश माना जा रहा है। जिले के 134 में से 100 जलाशयों में अब तक 25 फीसदी पानी भी जमा नहीं हो पाया है।

शहरों को पेयजल आपूर्ति करने वाले जलाशयों के हाल और बुरे हैं। खास बात यह कि सीजन को सिर्फ एक माह का समय शेष रह गया है। आगे भी बारिश के आसार कम नजर आ रहे हैं। ऐसे में गणपति बप्पा की अगवानी कर रहे लोग उनसे बारिश साथ लाने की मिन्नतें कर रहे हैं।

पूर्वी और पश्चिमी भाग में बारिश, उत्तर में नहीं
इस बार बारिश ने जिले को दो हिस्सों में बांट दिया। पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में अच्छी बारिश हुई। जबकि उत्तरी भाग में उम्मीदों के मुताबिक बारिश नहीं हो पाई। जिले के उमरेठ, परासिया, अमरवाड़ा और हर्रई से नरसिंहपुर बार्डर तक उम्मीदों के मुताबिक बारिश नहीं हो पाई है।

फोरकास्टिंग भी फेल हुई
जिले में बारिश को लेकर मौसम विभाग की फोरकास्टिंग भी कई बार फेल हुई। अगस्त में 8 से 10 तारीख के बीच जोरदार बारिश का अनुमान था, इसी तरह 20 व 22 अगस्त को भी तेज बारिश का अनुमान फेल हो गया। अनुमान के मुताबिक बादल जरूर जिले में छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई। 

तीन साल से बिगड़ी स्थिति
जिले में बारिश का चक्र पिछले तीन साल से गड़बड़ाया हुआ है। पिछले साल भी हालात लगभग ऐसे ही थे। बीते वर्ष सितंबर और अक्टूबर में बारिश का कोटा पूरा हो पाया था। जानकार इस बार भी वैसी ही उम्मीदें जता रहे हैं, लेकिन सितंबर के 12 दिन बीतने पर भी बारिश का ठिकाना नहीं होने से चिंता बढ़ गई है। 

कन्हरगांव और जूनेवानी डेम खाली
छिंदवाड़ा शहर में जलापूर्ति करने वाला कन्हरगांव डेम में अब तक 2.33 एमसीएम पानी इकट्ठा हुआ है। शहर की साल भर की जरूरत 7.08 एमसीएम की है। ऐसे में आने वाले दिनों में डेम भरा नहीं तो भविष्य में जल संकट विकराल हो सकता है। यही स्थिति पांढुर्ना को जलापूर्ति करने वाले जूनेवानी जलाशय की है। यहां 1.33 एमसीएम पानी जमा हुआ है जबकि पांढुर्ना की जरूरत 2.63 एमसीएम की है। 

134 में से 100 डेम 25 फीसदी तक भर पाए
जिले के 134 छोटे जलाशयों में से सिर्फ 18 ही भर पाए हैं। 11 जलाशय 50 प्रतिशत तक तो तीन जलाशय 75 फीसदी भर पाए हैं। जबकि 94 जलाशयों में 25 फीसदी या उससे कम पानी जमा हो पाया है। आठ डेम तो अब भी सूखे जैसी स्थिति में हैं। जलाशयों की यह स्थिति आने वाले रबी सीजन के लिए दुखदायी साबित हो सकती है। फसलों में सिंचाई का संकट खड़ा हो सकता है। 

इनका कहना है
पिछले तीन साल से ऐसे हालात बन रहे हैं। इस बार शुरूआत से ही स्थिति गड़बड़ है। अगस्त के कोटे की बारिश नहीं हुई है। लौटते मानसून से बारिश की उम्मीदें हैं। चक्रवात उठ जाए और कम प्रेशर का दबाव बन जाए तो अच्छी बारिश हो सकती है।
- डॉ विजय पराडकर, सहायक संचालक कृषि अनुसंधान केंद्र

ज्योतिषीय पक्ष के अनुसार अक्टूबर में बारिश के योग
इस बार जुलाई से काल सर्प योग के प्रभाव के चलते खंड में बारिश के योग बने। कर्क राशि में राहू जब आता है तब बारिश कम होती है। 17-18 सितंबर से लेकर अक्टूबर माह में बारिश के योग बन सकते हैं।
- पंडित रजनीश आचार्य, ज्योतिषाचार्य

समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया यहाँ दें l

ई-पेपर