comScore
Dainik Bhaskar Hindi

प्लेबॉय मैगजीन के फाउंडर ह्यू हेफनर का निधन, मैगजीन की तरह ही रंगीन थी जिंदगी

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 29th, 2017 15:08 IST

1.7k
0
0

डिजिटल डेस्क,न्यूयॉर्क। मशहूर मागजीन 'प्लेबॉय' के फाउंडर ह्यू हेफनर ने 91 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। प्लेबॉय एंटरप्राइजेस ने बयान जारी कर बताया कि हेफनर का उनके घर 'प्लेबॉय मेंशन' पर निधन हो गया।

हेफनर काफी समय से बीमार चल रहे थे, वो अगस्त में 'प्लेब्वॉय' के सालाना प्रोग्राम में भी शामिल नहीं हो पाए थे। हेफनर अपने स्टाइल और लग्जरी लाइफ के लिए काफी मशहूर थे। वो अक्सर ही रेड स्मोकिंग जैकेट और मुंह में पाइप लिए दिखाई देते थे।

हेफनर का जन्म शिकागो में हुआ, उनके पिता एक स्कूल टीचर थे। हाई स्कूल के बाद ह्यू ने क्लर्क के रूप में आर्मी ज्वॉइन की। हेफनर एस्क्वॉयर मैगजीन में कॉपी राइटर भी रहे।

कब हुई प्लेबॉय मैगजीन की शुरुआत?

प्लेबॉय मैगजीन की शुरुआत 60 साल पहले 1953 में हुई थी। ये मैगजीन अपने कॉन्टेंट को लेकर पुरुषों के बीच काफी लोकप्रिय हुई। मैगजीन लॉन्च के 7 साल बाद हेफनर ने प्लेब्वॉय क्लब की शुरुआत की। 

शुरुआत में इस क्लब की सालाना मेंबरशिप फीस 25 डॉलर थी। इसकी सफलता और बढ़ती लोकप्रियता के बाद हेफनर ने लंदन, जमैक, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, डेट्रायट, सैन फ्रांसिस्को, बोस्टन, डेस मोइन्स, कनास सिटी और सेंट लुइस और लाग वेगास में क्लब खोले गए। इसके बाद भी दुनियाभर के कई शहरों में प्लेब्वॉय क्लब खोले गए।
इस मैगजीन की जो चीज लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचती है, वो है इसमें छपने वाली तस्वीरें और आर्टिकल्स।इसका कंटेंट काफी बोल्ड और अडल्ट हुआ करता था। इसमें मॉडल्स की न्यूड तस्वीरें हुआ करतीं थीं। मैगजीन के पहले सेंटरफोल्ड में मशहूर एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो का न्‍यूड फोटो छपा था, जिसे देख पूरे अमेरिका में हंगामा मच गया और देखते-देखते प्‍लेब्‍वॉय खासतौर पर युवाओं की पहली पसंद बन गई।

ये भी पढ़ें-Oh no! इलियाना ने खुलेआम किया इस गोरे को KISS

हेफनर ने इस मैगजीन की शुरुआत महज 1600 डॉलर से की थी, जिसमें से 1000 डॉलर उन्होंने अपनी मां से उधार लिए थे। आज भी प्लेब्वॉय एंटरप्राइसेस टेलीविजन नेटवर्क, वेबसाइट्स, मोबाइल प्लेटफॉर्म्स और रेडियो के जरिए शौकीनों तक एडल्ट कंटेंट पहुंचा रहा है।

स्‍कैंडल्‍स से भरी थी हेफनर की लाइफ 

हेफनर की मैगजीन जितनी रंगीन थी ठीक वैसी ही उनकी लाफ भी रंगीन और स्‍कैंडल्‍स से भरी हुई थी। वहीं हेफनर की गर्लफ्रेंड होली मैडिसन ने उनसे अलग होने के बाद आरोप लगाया था कि उनके तमाम लड़कियों से संबंध थे।

मैडिसन के मुताबिक हेफनर अपने घर में आने वाली हर लड़की का फोटो रखते थे। वो एक डायरी अपने संबंधो के बारे में लिखते थे। डायरी में इसकी जानकारी होती थी कि उनके किसके साथ रिश्ते बने। हेफनर को तो याद ही नहीं था कि वो अब तक कितनी औरतों के साथ रिश्ते बना चुके हैं। डेली मिरर में छपी एक रिपोर्ट में हेफनर ने बताया था कि वो बहुत पहले ही गिनती करना बंद कर चुके हैं। ऐसा कहा जाता है कि हेफनर 5000 औरतों के संग संबंध बना चुके थे।

हेफनर ने 'प्‍लेब्‍वॉय' के लोगो के रूप में रैबिट को चुना था। इसके पीछे की वजह भी बड़ी अीब थी। हेफनर ने एक इंटरव्‍यू में इस लोगो के बारे में खुसाला किया था। उन्‍होंने कहा था कि रैबिट एक ऐसा जन्‍तु है, जो अमेरिका में ‘सेक्‍स’ से जोड़कर देखा जाता है। उनकी नजर में ये फुर्तीला है, चतुर है, शर्मीला है और इधर-उधर कूदने वाला सेक्‍सी और हॉट है।

ये भी पढ़े-तो... इस बात का प्रियंका चोपड़ा को है आज तक अफसोस

7 अरब में नीलाम हुआ था विवादित मैन्शन 

जनवरी 2016 में यानि ठीक एक साल पहले ही इस बात की घोषणा हुई थी कि मशहूर एडल्ट मैगजीन Playboy के ओनर हेफनर अपने विवादित प्लेबॉय मैनशन को बेचने वाले हैं। हेफनर की इस घोषणा के कुछ महीनों बाद ये मैनशन करीब 7 अरब रुपयों में बेचा दिया गया था। बताते है कि प्लेबॉय हेफनर यहां अपनी गर्लफ्रेंड्स के साथ रहता था और उनके साथ इंजॉय करता था। 

मैन्शन के थे 9 नियम

वैसे, कम लोगों को ये पता है कि हेफनर ने इस मैन्शन में कुछ नियम बना रखे थे। ये 9 रूल्स थे जिन्हें फॉलो ना करने वाली लड़कियों को मैन्शन से बाहर कर दिया जाता था।
प्लेबॉय मैन्शन काफी विवादित था। एक समय मैन्शन के अंदर के कई डर्टी सीक्रेट्स ओपन हो चुके थे। बताते है कि मैन्शन में रहने वाली सभी लड़कियां हेफनर की प्रॉपर्टी समझी जाती थीं। मैन्शन में रहने वाली इन लड़कियों के साथ हेफनर के फिजिकल रिलेशन्स थे। पैसों के लिए लड़कियां उसकी हर बात मानती थी। मैन्शन में रहने वाली लड़कियों को हेफनर हर हफ्ते करीब 70 हजार रुपए देता था।

हेफनर के इंटरव्यूज में उसके मैन्शन की किसी भी लड़की को कुछ बोलने की इजाजत नहीं देता था। उसका मानना था कि जब मर्द बोल सकता है तो औरतों को बोलने की क्या जरूरत है।

 

समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया यहाँ दें l

ई-पेपर