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प्रदाेष व्रत कल, 11 या 26 के बाद इस दिन करें उद्यापन

BhaskarHindi.com | Last Modified - November 14th, 2017 10:16 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु और शिव को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। इनकी आराधना करने से मनुष्य को जीवन के सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। एकादशी के बाद 15 नवंबर गुरूवार को प्रदोष व्रत है। यह भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन जन्म चक्र से मुक्ति पाने के लिए, गृह कलह एवं जीवन में असंतोष को दूर करने के लिए यह व्रत रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्रतधारी जन्मांतर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है। उसे उतम लोक की प्राप्ति होती है। यह दिन शिव की आराधना के लिए माने जाने वाले श्रेष्ठ दिनों में से एक है। 

 

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व्रत के बाद उद्यापन विधि

- इस दिन भगवान शिव की आराधना करने के साथ ही ओम नमः शिवाय, देवाधि देव महादेव भोलेनाथ शिवशंकर, मंत्र का जाप करना चाहिए। 

- प्रदोष व्रत 11 या फिर 26 रखने चाहिए। इसके बाद इसके उद्यापन का महत्व है। 

- उद्यापन विधि-विधान से विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में त्रयोदशी तिथि को ही किया जाना चाहिए।

- शिव पूजन के इस विशेष व्रत के उद्यापन से पूर्व एक दिन पहले श्रीगणपति का पूजन करें और रात्रि जागरण कर सब कुछ मंगलकारी होने की प्रार्थना करें। 

- जिस दिन उद्यापन पूजन है एक मंडप बनाएं और उसे रंगोली के साथ वस्त्रों से भी सजाएं। 

- इस दौरान शिव मंत्र का जाप 108 बार करें। 

- हवन के साथ ही आहूति में खीर का प्रयोग करें। बाद में प्रसाद के लिए भी खीर का ही प्रयोग करें। 

- पूजन के बाद शिव-पार्वती की आरती और शांति पाठ करें। 

- पूजन के पश्चात सभी को प्रसाद वितरित करें और सामथ्र्य के अनुसार दो या फिर एक ब्राम्हण को भी भोजन कराया जा सकता है। 

- इस दिन गरीबाें काे भी भाेजन कराने आैर दान देने का महत्व है।

 

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