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दहेज मामलों में नहीं होगी तुरंत गिरफ्तारी : सुप्रीम कोर्ट

July 28th, 2017 11:43 IST
दहेज मामलों में नहीं होगी तुरंत गिरफ्तारी : सुप्रीम कोर्ट

डिजिटल डेस्क, नई दल्ली। दहेज उत्पीड़न मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा है कि दहेज की शिकायतों पर पुलिस तुरंत गिरफ्तारी नहीं करेगी। कोर्ट ने कहा कि जब तक जिले की प्रत्येक परिवार कल्याण समिति दहेज उत्पीड़न मामलों में पुलिस को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती तब तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
 
आपको बता दें कोर्ट ने ये फैसला दहेज के झूठे केस और धारा 498-ए के हो रहे दुरुपयोग के मद्देनजर अदालत ने ये कदम उठाया है।दरअसल एक महिला ने केवल फंसाने के इरादे से अपने पति और ससुरालवालों पर दहेज का झूठा केस दर्ज कराया था। मामले में सास-ससुर, छोटे भाई बहन और बच्चों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। जस्टिस ए के गोयल और यूयू ललित की खंडपीठ ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे झूठे मामलों में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। 
 
खंडपीठ ने कहा कि प्रताड़ना झेलने वाली महिलाओं को ध्यान में रखते हुए ये कानून बनाया गया था। लेकिन इस कानून के तहत आजकल बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। ये बेहद गंभीर बात है, इस स्थिति से निपटने के लिए सिविल सोसायटी को इससे जोड़ाना होगा।
साथ ही इस तरह का प्रयास करने की जरूरत है कि समझौता होने की सूरत में मामला हाई कोर्ट में न जाए, बल्कि बाहर ही दोनों पक्षों में समझौता करा दिया जाए।
 
सुप्रीम कोर्ट ने जारी की गाइडलाइन 
 
1-मुकदमे के दौरान हर आरोपी को अदालत में उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी।
2-कोई आरोपी यदि विदेश में रह रहा है, तो सामान्य तौर पर उसका पासपोर्ट जब्त नहीं होगा। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी नहीं होगी।
3-हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए।
4-समिति में सामाजिक कार्यकर्ता, अधिकारियों की पत्नियों आदि को शामिल किया जा सकता है। इसके सदस्यों को गवाह नहीं बनाया जा सकता। 
5- धारा 498-ए के तहत पुलिस या मजिस्ट्रेट तक पहुंचने वाली शिकायतों को समिति के पास भेज दिया जाना चाहिए। एक महीने में समिति रिपोर्ट देगी।
6-रिपोर्ट आने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। समिति की रिपोर्ट पर जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट मेरिट के आधार पर विचार करेंगे। -धारा 498-ए की शिकायत की जांच विशिष्ट अधिकारी जरिए होनी चाहिए।
क्या है धारा 498-ए 
इस क़ानून के तहत यदि कोई विवाहित महिला मजिस्ट्रेट जज के सामने यह कहे कि उसे ससुराल वालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित किया या किसी प्रकार की यातना दी है, तो जिसके खिलाफ वो बयान देगी उसे तुरंत जेल में डाल दिया जाएगा।
इस मामले में जेल जाए बिना बेल भी नहीं मिलती और अदालत की अनुमति के बिना पीड़िता केस भी वापस नहीं ले सकती। इस धारा के तहत दोषी पाए गए व्यक्ति को 3 साल तक कैद की सज़ा हो सकती है।
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